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बिना सिगरेट पीए भी बन सकते है सीओपीडी के मरीज
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सिगरेट न पीने वाले 40% लोग भी सीओपीडी के शिकार
केजीएमयू के शोध में हुआ खुलासा, चूल्हे पर खाना बनाने वालों को एक दिन मिलता है सौ सिगरेट के बराबर धुआं
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की बीमारी अस्थमा से भी ज्यादा खतरनाक है। यह सिगरेट नहीं पीने वालों को भी हो सकती है। सबसे ज्यादा खतरा चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं को होता है। बायोमास फ्यूल का धुआं उनका फेफड़ा खराब कर रहा है। वे एक दिन में सौ सिगरेट के बराबर धुआं ग्रहण करती हैं। यही वजह है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा होती है। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू की शोध में।
केजीएमयू रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि क्लीनिकल डेमोग्रफिक एंड रेडियोलॉजिकल प्रोफाइल ऑफ स्मोकर एंड नॉन स्मोकर पेशेंट स्टडी अगस्त 2014 से शुरू की गई और 2019 में खत्म हुई। शोध में शामिल 360 मरीजों में 216 धूम्रपान के आदी और 144 धूम्रपान न करने वालों को शामिल किया गया था। इस दौराना पाया गया कि 60 फीसदी स्मोकिंग और 40 फीसदी स्मोकिंग न करने वाले भी बीमारी की चपेट में आए। खास बात यह थी कि धूम्रपान न करने के बाद भी बीमारी की चपेट में आने वालों में 70 फीसदी महिलाएं थीं।
वे बायोमास फ्यूल की वजह से बीमारी की चपेट में आईं। डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि बायोमास फ्यूल का धुआं मरीजों के लिए घातक रहा। कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड से मरीज के सांस नली का मेक्रोफेजेज सेल, सीलिया, म्यूकस भी नष्ट हो जाता है। सांस नली में सूजन आ जाती है। करीब एक चौथाई मरीजों में यह बीमारी एक्सरे में पकड़ में नहीं आती है। इसे लक्षण के आधार पर डायग्नोसिस किया जाता है। उन्होंने दावा कि किया सीओपीडी पर देश में पहला शोध वर्ष 2012 में चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन द्वारा स्लम एरिया में किया गया। केजीएमयू द्वारा देश में टर्शियरी सेंटर में शोध किया गया। यह दूसरा शोध है। इसे इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित किया गया है।
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क्या है बीमारी का लक्षण
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि धूम्रपान करने वालों की सांस फूलने लगती है। शारीरिक कमजोरी होती है। काम में मन नहीं लगता है। धूम्रपान नहीं करने वालों में खांसी के साथ बलगम आता है।
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केजीएमयू के शोध में हुआ खुलासा, चूल्हे पर खाना बनाने वालों को एक दिन मिलता है सौ सिगरेट के बराबर धुआं
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की बीमारी अस्थमा से भी ज्यादा खतरनाक है। यह सिगरेट नहीं पीने वालों को भी हो सकती है। सबसे ज्यादा खतरा चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं को होता है। बायोमास फ्यूल का धुआं उनका फेफड़ा खराब कर रहा है। वे एक दिन में सौ सिगरेट के बराबर धुआं ग्रहण करती हैं। यही वजह है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा होती है। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू की शोध में।
केजीएमयू रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने बताया कि क्लीनिकल डेमोग्रफिक एंड रेडियोलॉजिकल प्रोफाइल ऑफ स्मोकर एंड नॉन स्मोकर पेशेंट स्टडी अगस्त 2014 से शुरू की गई और 2019 में खत्म हुई। शोध में शामिल 360 मरीजों में 216 धूम्रपान के आदी और 144 धूम्रपान न करने वालों को शामिल किया गया था। इस दौराना पाया गया कि 60 फीसदी स्मोकिंग और 40 फीसदी स्मोकिंग न करने वाले भी बीमारी की चपेट में आए। खास बात यह थी कि धूम्रपान न करने के बाद भी बीमारी की चपेट में आने वालों में 70 फीसदी महिलाएं थीं।
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वे बायोमास फ्यूल की वजह से बीमारी की चपेट में आईं। डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि बायोमास फ्यूल का धुआं मरीजों के लिए घातक रहा। कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड से मरीज के सांस नली का मेक्रोफेजेज सेल, सीलिया, म्यूकस भी नष्ट हो जाता है। सांस नली में सूजन आ जाती है। करीब एक चौथाई मरीजों में यह बीमारी एक्सरे में पकड़ में नहीं आती है। इसे लक्षण के आधार पर डायग्नोसिस किया जाता है। उन्होंने दावा कि किया सीओपीडी पर देश में पहला शोध वर्ष 2012 में चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन द्वारा स्लम एरिया में किया गया। केजीएमयू द्वारा देश में टर्शियरी सेंटर में शोध किया गया। यह दूसरा शोध है। इसे इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित किया गया है।
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क्या है बीमारी का लक्षण
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि धूम्रपान करने वालों की सांस फूलने लगती है। शारीरिक कमजोरी होती है। काम में मन नहीं लगता है। धूम्रपान नहीं करने वालों में खांसी के साथ बलगम आता है।