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मेट्रो की फीडर सेवा पर तीन साल बाद भी काम शून्य, कैब से लेकर दो पहिया इलेक्ट्रिक व्हीकल, ई-रिक्शा के प्रयोग हो चुके फेल

Wed, 03 Mar 2021 02:16 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 02:16 AM IST
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no work in metro feeder service
लखनऊ में करीब तीन साल पहले मेट्रो सेवा शुरू हुई। शुरूआत से ही फीडर सर्विस के जरिए मेट्रो स्टेशनों तक यात्रियों को पहुंचाने व वापस जाने की सुविधा देने की कवायद शुरू हुई। तीन साल की बैठकों और कागजी कार्रवाई के बाद परिणाम शून्य ही है। घटी राइडरशिप का संकट झेल रही लखनऊ मेट्रो के पास फीडर सर्विस के लिए कोई विकल्प नहीं है। इसका असर जहां यात्रियों की संख्या घटाने के रूप में सामने आ रहा है। वहीं यात्रियों को भी अपने निजी वाहनों से स्टेशनों तक पहुंचना पड़ रहा है।
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मेट्रो के रेडलाइन यानी एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया के आंकड़ों को देखें तो रोजाना अभी करीब 46000 यात्री सेवा का उपयोग कर रहे हैं। यह कोविड के पहले से अभी भी करीब 25 प्रतिशत कम है। खुद मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि राइडरशिप इस लाइन पर करीब तीन गुना यानी 1.50 लाख यात्री रोजाना होनी चाहिए। इसके लिए फीडर सर्विस भी उतनी ही जरूरी है। जितना जरूरी मेट्रो रूट से सिटी बस, ऑटोरिक्शा, ई-रिक्शा को हटाया जाना है। कैब, रेंट पर साइकिल, बाइक टैक्सी को फीडर सर्विस में शामिल करने की पहल मेट्रो की अभी तक फेल ही रही है। इनमें से कोई सेवा शुरू नहीं की जा सकी है।
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ऐसे में बढ़ाना होगा किराया
मेट्रो के एक अधिकारी ने बताया कि राइडरशिप अगर नहीं बढ़ी तो खर्च निकालने और यूरोपियन यूनियन बैंक के कर्ज की किस्तें अदा करने के लिए किराए में बढ़ोतरी करनी होगी। तीन साल से मेट्रो का किराया नहीं बढ़ा है। ऐसा बाकी ट्रांसपोर्ट की तुलना में मेट्रो को किफायती रखने और राइडरशिप को कम होने से रोकने के लिए किया गया। आने वाले समय में अगर दूसरी मदों जैसे कॉमर्शियल स्पेस से आय नहीं बढ़ी तो किराया ही बढ़ाना विकल्प बचेगा।
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रूट तय हों, तब मिले फायदा
मेट्रो के एमडी कुमार केशव का कहना है कि 21 किमी में मेट्रो अपनी सेवाएं दे रही है। हमने सरकार से मांग की है कि मौजूदा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नए रूट पर शिफ्ट कर दें। इससे मेट्रो की राइडरशिप को बढ़ाने में मदद मिलेगी। अलग-अलग विभाग इस पर काम कर रहे हैं। अलग-अलग बैठकों में कुछ सहमति भी बनी है। उम्मीद है कि जल्दी ही रूट इनके तय हो जाएंगे। इससे मेट्रो को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
नए परमिट मेट्रो की फीडर सर्विस के लिए जरूरी
लार्ट्स के अध्यक्ष पंकज दीक्षित का कहना है कि शहर का क्षेत्रफल की तुलना में अभी मौजूदा ऑटो परमिट पहले ही कम हैं। ऐसे में मेट्रो की फीडर सर्विस के लिए जरूरी है कि नए परमिट जारी हों। हमने मेट्रो अधिकारियों को भी एक ज्ञापन दिया है कि आरटीओ को संस्तुति करीब 210 परमिट के लिए करें। यह परमिट मेट्रो के फीडर सर्विस के लिए तय रूट के लिए विशेष रूप से हों। इनके संचालन के लिए लोकेशन भी परमिट जारी करते समय तय की जाए। इससे दूसरे रूट पर इनको चलाया ही नहीं जा सके।

कोविड की वजह से नहीं शुरू हो पाई फीडर सर्विस
एमडी कुमार केशव का कहना है कि फीडर सर्विस के लिए ई-साइकिल, कैब और बाइक टैक्सी के लिए सहमति निजी कंपनियों से हो चुकी है। कोविड की वजह से कंपनियां काम शुरू नहीं कर पाईं। दोबारा से कवायद शुरू हुई है। जल्दी ही फीडर सर्विस लखनऊ में शुरू हो जाएगी। हमारी कोशिश है कि यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव दिया जाए। राइडरशिप भी इससे निश्चित ही बढ़ेगी।
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