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Lucknow News: प्लेटलेट्स व प्लाज्मा के लिए नहीं होगा भटकना

Fri, 27 Sep 2024 07:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Fri, 27 Sep 2024 07:29 PM IST
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No need to wander for platelets and plasma
जिला अस्पताल में ब्लड सेपरेशन यूनिट मशीन में ब्लड से प्लेटलेट्स निकालते की प्रक्रिया को चेक करत - फोटो : संवाद
रायबरेली। मरीजों को इलाज के लिए प्लेटलेट्स के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। जिला अस्पताल में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट ने बृहस्पतिवार से काम करना शुरू कर दिया। मरीजों को अब ब्लड के तत्व प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, रेड ब्लड सेल आसानी से मिलेंगे। पहले दिन करीब तीन घंटे में 240 मिली लीटर प्लेटलेट्स ब्लड से निकाली गई। इसके अलावा प्जाल्मा और आरबीसी को भी ब्लड बाहर कर फ्रिज में रखा गया।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 350 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 20-30 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। सरकारी अस्पतालों में अब तक ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। खासकर डेंगू, आग से जलने सहित कई मामलों में मरीजों को सिर्फ ब्लड के सहयोगी तत्व चढ़ाने की जरूरत होती है।
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बीती 29 जून को डीएम ने यूनिट का शुभारंभ कर दिया था, लेकिन खामियां होने के कारण यूनिट को शुरू नहीं कराया जा सका था। बृहस्पतिवार से यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया। सीनियर लैब टेक्नीशियन राजकुमार, लैब टेक्नीशियन संजय कुमार, राजेंद्र, अंशिका सिंह, शालिनी श्रीवास्तव, चंदन वर्मा, कामतानाथ की टीम यहां काम कर रही है।
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ऐसे कार्य कर रही कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
रक्त में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में रक्त की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट रक्त से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी कर सकती है।

इनसेट
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को शुरू करा दिया गया है। पहले दिन 60 मिली लीटर के चार पाउच तैयार हो गए है। प्लाज्मा और आरबीसी को भी ब्लड से निकाला गया है। डिमांड के हिसाब से प्लेटलेट्स मरीजों को उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों को किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होगी।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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