फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   no need of changing the name of shaheed path in lucknow

'हादसे घटे, शहीद पथ का नाम बदलने की जरूरत नहीं'

Mon, 12 Oct 2015 01:40 PM IST
Updated Mon, 12 Oct 2015 01:40 PM IST
विज्ञापन
no need of changing the name of shaheed path in lucknow

हादसों की वजह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दिए नाम ‘अमर शहीद पथ’ को बदलने की तैयारी कर ली गई। नगर निगम सदन ने तो इसका प्रस्ताव भी पास कर दिया। पर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सेफ्टी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शहीद पथ पर सुरक्षा बंदोबस्तों के बाद हादसों में कमी आई है।

विज्ञापन


ऐसे में नाम बदलने की नहीं बल्कि नियमों का पालन कराने की जरूरत है।निजी कंपनी पीएनसी कानपुर अयोध्या टॉलवेज प्रा.लि. की ओर से तैयार की सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट में अगस्त 2013 से लेकर अगस्त 2015 तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन


इन आंकड़ों को तीन वर्गों भयानक, गंभीर और छोटे हादसों में बांटा गया है। आंकड़ों में बताया गया है कि मई 2014 में तीन भयानक और चार गंभीर हादसे हुए। जबकि मई 2015 में  तीन गंभीर हादसे ही हुए। फरवरी 2014 में दो भयानक और आठ गंभीर हादसे हुए। इसी महीने में 2015 में कोई भयानक हादसा नहीं हुआ, वहीं गंभीर हादसा भी केवल एक ही हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

सुरक्षा बंदोबस्त से बदल गए हालात

no need of changing the name of shaheed path in lucknow

एनएचएआई के परियोजना निदेशक पी शिवशंकर का कहना है कि पिछले महीनों में शहीद पथ पर सुरक्षा को लेकर काफी काम हुआ। 19 किमी लंबे शहीद पथ पर डिवाइडर पर बेरीकेडिंग लगाने से लेकर दोनों तरफ साइड में भी रेलिंग लगवाई गई।

इससे रिहायशी इलाके से जानवर एकदम से सड़क पर नहीं आ सकें। रेलवे और नगर निगम की मदद से स्ट्रीट लाइट भी लग गई हैं। इससे भी रात के समय होने वाले हादसों में कमी आई। 2015 में जनवरी के बाद से यह अंतर साफ हादसों के आंकड़ों में दिखता है।

निजी कंपनी के सहायक प्रबंधक सेफ्टी एंड कॉरीडोर महेश कौशिक ने बताया कि शहीद पथ की सेफ्टी ऑडिट में हादसों की वजह इसका डिजाइन नहीं है। काफी कमियों को दूर किया जा चुका है।

हादसों की बड़ी वजह अचानक से रोड पर आने वाले वाहन हैं। यहां साफ तौर पर साइन बोर्ड लगे हैं कि कहां से एंट्री लें। कहां से नहीं लें। एंट्री बंद होने वाली जगह से भी लोग मुख्य लेन में आ जाते हैं।

कई जगह रेलिंग को तोड़ने और वहां से एंट्री लेने की घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसे में हादसों की संख्या बढ़ती है। यह लोगों की खुद की गलती से होता है। इसमें खुद की जान जाने का खतरा तो होता ही है। वह दूसरों के लिए भी नुकसानदेह बन जाते हैं।

शहीद पथ को सुरक्षित बनाने केलिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कई बड़े काम पहले ही कराए जा चुकेहैं। हर महीने के आंकड़े भी जुटाए जाते हैं। ‘अमर शहीद पथ’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का दिया नाम है। इसे बदलने की नहीं, बल्कि  सुरक्षा इंतजाम और नियम मानने से ही शहीद पथ सुरक्षित होगा।
पी शिवशंकर, परियोजना निदेशक, एनएचएआई

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed