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शर्मनाकः मासूम की मौत के बाद कंधे पर शव लाद कर ले गया पिता

Thu, 06 Sep 2018 03:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 06 Sep 2018 03:08 PM IST
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no help of patient in balrampur hospital
- फोटो : डेमो
बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में मासूम बच्ची की मौत के बाद पिता बिलखते हुए शव कंधे पर लादकर घर ले गया। अस्पताल से शव वाहन तक नहीं मुहैया कराया गया। करीब आधा किमी. पैदल चलने के बाद बाद तीमारदारों ने रिक्शा किया। इसके बाद खुले में शव लेकर घर गए।
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शासन का सख्त निर्देश है कि कोई भी शव खुले में नहीं लेकर जाने दिया जाएगा। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। गरीब मरीजों की मौत बाद भी शव मुहैया नहीं कराया जा रहा।
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कैसरबाग ख्यालीगंज के रहने वाले प्रमोद की नौ माह की बेटी खुशी को तीमारदारों ने बुधवार दोपहर करीब एक बजे इमरजेंसी में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया।
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इकलौती बेटी की मौत के बाद मानो मां-बाप का उसका सब कुछ लुट गया। गम में दिल वैसे ही बैठा जा रहा था, मगर बारी शव घर ले जाने की आई तब भी जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ लिया। अस्पताल से बिना शव वाहन मुहैया कराए ही घरवालों को भेज दिया गया। 
 

सरकारी अस्पतालों में है शव वाहन की व्यवस्था

no help of patient in balrampur hospital
डेमो
काकोरी इलाके के रहने वाले एक बच्चे की मौत बाद भी अस्पताल से शव वाहन न मिलने पर तीमारदार बाइक पर शव लादकर ले गए थे। मामले में फजीहत होने पर अधिकारियों ने गरीब मरीजों की मौत बाद शव वाहन अस्पताल से मुहैया कराने का दावा किया था।

राजधानी के तीन बड़े सरकारी अस्पताल सिविल, बलरामपुर व लोहिया अस्पताल में गरीब मरीजों की मौत बाद शव वाहन की व्यवस्था कराई गई थी। जिले से बाहर शव वाहन भेजने के लिए सीएमओ की अनुमति लेनी पड़ती है। आरोप है कि गरीब मरीजों की मौत के बाद भी अस्पताल शव वाहन मुहैया नहीं करा रहा।

मुहैया कराया जाता है शव वाहन
गरीब मरीजों के लिए शव वाहन की व्यवस्था है। जरूरतमंद तीमारदारों को शव वाहन मुहैया कराया जाता है। बुधवार सुबह ही एक तीमारदार के लिए शव वाहन भेजा गया था। तीमारदारों ने शव वाहन की मांग नहीं की होगी, वरना फौरन व्यवस्था कराई जाती है। - डॉ. ऋषि सक्सेना, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल  
 
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