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एनजीटी सख्त : गोमती के 100 मीटर दायरे में कूड़ा डालने पर रोक, नालों पर लगेंगी जालियां

Fri, 26 Apr 2019 12:25 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 26 Apr 2019 12:25 AM IST
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no garbage within 100 meters of gomti river, ngt ordered
गोमती नदी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गोमती नदी तट के 100 मीटर के दायरे में कूड़ा डंप करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। पहले से डंप कूड़े को तीन दिन में हटाने को भी कहा है।
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वहीं जो नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं उन पर जालियां लगाने का आदेश दिया है, ताकि नदी में कचरा न जाए। एनजीटी ने अस्पताली कचरा और मलबा निस्तारण के साथ प्रतिबंधित पॉलिथीन को लेकर क्या कार्रवाई हुई, इस पर भी नगर निगम से रिपोर्ट तलब की है।
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एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बाद नगर निगम ने एक साल पहले घैला डंपिंग ग्राउंड पर तो कूड़ा डंप करना बंद कर दिया, लेकिन नदवा कॉलेज के सामने, झूलेलाल घाट के आसपास और गऊघाट के आसपास कई जगह पर गोमती नदी तट के पास अब भी कूड़ा जमा किया जा रहा है। 
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बुधवार को शासन में हुई एनजीटी की उच्चस्तरीय बैठक में इस पर कड़ी नाराजगी जताई गई और नगर निगम को वहां पर कूड़ा डंपिंग बंद करने का आदेश दिया गया। वहीं गोमती तट के 100 मीटर दायरे में डाले गए कचरे को तीन दिन में हटवाने का आदेश दिया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने नदी तट के आसपास से कूड़ा हटवाने का काम शुरू कर दिया है।
 

नदी में सीधे गिर रहे सात नाले

गोमती को प्रदूषण से बचाने के लिए शहर में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। उनमें भरवारा एसटीपी से 22 नाले और दौलतगंज एसटीपी से चार नाले जोड़े गए हैं, लेकिन सात नाले अभी भी ऐसे हैं जो सीधे गोमती में गिरते हैं। बिना किसी रुकावट के सीधे नदी में गिरने वाले नालों का कचरा भी नदी में चला जाता है। इसे रोकने के लिए शासन के बाद अब एनजीटी ने भी ऐसे नालों के मुहाने पर जाली लगाने का आदेश दिया है।

सीधे नदी में जा रहा 350 एमएलडी सीवर
अभी शहर में जो सीवर निकला रहा है, वह करीब 750 एमएलडी है। वहीं दौलतगंज व भरवारा को मिलाकर दोनों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता सिर्फ 400 एमएलडी ही है। ऐसे में करीब 350 एमएलडी सीवर ओवर फ्लो कर सीधे गोमती नदी में जा रहा है। इसे रोकने के लिए जल निगम ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की योजनाएं बनाईं, लेकिन बजट की कमी से ये जमीन पर नहीं उतर पा रही हैं।

एनजीटी ने इस पर भी नगर निगम से तलब की रिपोर्ट

  • शहर में अस्पतालाें से कितना कचरा निकलता है और उसका कैसे निस्तारण किया जा रहा है।
  • पॉलिथीन का प्रयोग रोकने को लेकर अब तक नगर निगम व संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई। 
  • शहर में निकलने वाले मलबे के निस्तारण को लेकर क्या किया जा रहा है। इस संबंध में क्या कोई कार्य योजना बनाई गई है।

सख्ती पर कहा-एनजीटी के निर्देशों पर होगा अमल

पर्यावरण अभियंता व नगर स्वास्थ्य अधिकारी पंकज भूषण का कहना है कि गोमती में जो नाले सीधे गिर रहे हैं उन पर जाली लगाई जाएगी। वहां पर कर्मचारी तैनात किए जाएंगे जो जाली पर जमा होने वाले कचरे को हटाते रहेंगे। अस्पताली कचरे के निस्तारण के लिए काम किया जा रहा है। 

एक निजी कंपनी पीपीपी पर यह काम कई साल से कर रही है। मलबा निस्तारण को लेकर एक प्लांट लगाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। आचार संहिता समाप्त होने के बाद काम शुरू हो जाएगा। प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ भी अभियान चलाया जा रहा है। एनजीटी ने जो भी निर्देश दिए हैं उन पर अमल किया जाएगा। गोमती नदी के 100 मीटर के दायरे में कूड़ा डालना बंद कर वहां सफाई कराई जा रही है। 
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