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सियासी सरगर्मी में पीछे छूट गए आपदा पीड़ित

Wed, 31 Jul 2013 08:06 AM IST
लखनऊ/महेंद्र तिवारी
लखनऊ/महेंद्र तिवारी Updated Wed, 31 Jul 2013 08:06 AM IST
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no financial help for U'khand disaster victims

कुछ

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दिन पहले बतौर राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी ने आपदा पीड़ितों की मदद के लिए नए सिरे से नीति तय करने की आवश्यकता बताई थी।

साथ ही कहा था कि नीति तय करने के लिए कुछ बिंदुओं पर केंद्रीय गृह मंत्री व राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से बात की आवश्यकता है।

वे इस संबंध में बात कर आपदा पीड़ितों को जल्द से जल्द मदद दिलाएंगे, मगर अंबिका का विभाग बदलने के बाद अब राजस्व विभाग के अधिकारी हों या गृह विभाग के वे इस मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।

राजस्व विभाग के अफसर कह रहे हैं कि मामले का को-ऑर्डिनेशन गृह विभाग के पास है जबकि गृह विभाग के अधिकारी यह मामला शासन से तय होने की बात कर रहे हैं।


उत्तराखंड की आपदा को करीब डेढ़ महीने बीत गए लेकिन सरकार अभी तक यह नहीं तय कर पाई है कि आपदा के मृतक व लापता लोगों के परिजनों को किस तरह मदद की जाए।

इस बीच राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी का विभाग जरूर बदल गया है। उत्तराखंड में 16 जून को आई जल प्रलय के दौरान सूबे के हजारों श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा पर थे।

वहां आई भीषण तबाही में बड़ी संख्या में लोग दब गए, बह गए या लापता हो गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सूबे के 51 श्रद्धालुओं के शव मिल चुके हैं, जबकि करीब 700 लापता हैं।

इस बीच उत्तराखंड सरकार ने नियमों में बदलाव कर आपदा के एक महीना पूरा होने के बाद मृतक व लापता लोगों के परिजनों को सशर्त सहायता राशि देनी शुरू कर दी, मगर यूपी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

आपदा पीड़ितों को किस तरह मदद दी जाए, इस बारे में अब तक कोई नीति तय नहीं की जा सकी है। मामला गृह विभाग और राजस्व विभाग के बीच झूल रहा है। दोनों विभागों के बीच समन्वय का अभाव नजर आ रहा है।
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