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अयोध्या में मस्जिद के लिए चिह्नित जमीन पर कोई विवाद नहीं, 24 को सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में फैसला
Sat, 22 Feb 2020 09:34 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 22 Feb 2020 09:34 AM IST
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मस्जिद के लिए मिली जमीन
- फोटो : amar ujala
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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार की ओर से सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए दी जाने वाली पांच एकड़ जमीन का कोई दावेदार नहीं है। अयोध्या के जिलाधिकारी ने वक्फ बोर्ड को भेजी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि जमीन पूरी तरह गैर विवादित है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्रदेश सरकार ने अयोध्या के ग्राम धन्नीपुर सोहावल रौनाही में सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का फैसला किया। इसके बाद उस जमीन पर कई दावेदारों के सामने आने की खबरें आने से विवाद खड़ा हो गया था। इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।
उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैयद मोहम्मद शुऐब ने बताया कि अयोध्या के डीएम ने साफ कर दिया है कि चिह्नित जमीन पर कोई विवाद नहीं है, उसका मालिकाना हक प्रदेश सरकार का है। मोहम्मद शुऐब ने कहा कि 24 फरवरी को बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसमें सदस्यों से चर्चा कर जमीन लेने पर निर्णय किया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार मस्जिद के लिए चिह्नित जमीन पांच गाटा में है। इसका खसरा नंबर 100, 104, 105, 110 व 111 है। सभी गाटा की जमीनें एक-दूसरे से सटी हैं। इसके आसपास कई विवादित जमीनें हैं। जमीन पहचान करने में किसी चूक की वजह से इसके विवादित होने की बात फैली थी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक प्रदेश सरकार ने अयोध्या के ग्राम धन्नीपुर सोहावल रौनाही में सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का फैसला किया। इसके बाद उस जमीन पर कई दावेदारों के सामने आने की खबरें आने से विवाद खड़ा हो गया था। इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी थी।
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उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैयद मोहम्मद शुऐब ने बताया कि अयोध्या के डीएम ने साफ कर दिया है कि चिह्नित जमीन पर कोई विवाद नहीं है, उसका मालिकाना हक प्रदेश सरकार का है। मोहम्मद शुऐब ने कहा कि 24 फरवरी को बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इसमें सदस्यों से चर्चा कर जमीन लेने पर निर्णय किया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार मस्जिद के लिए चिह्नित जमीन पांच गाटा में है। इसका खसरा नंबर 100, 104, 105, 110 व 111 है। सभी गाटा की जमीनें एक-दूसरे से सटी हैं। इसके आसपास कई विवादित जमीनें हैं। जमीन पहचान करने में किसी चूक की वजह से इसके विवादित होने की बात फैली थी।
मस्जिद निर्माण के लिए नहीं बना कोई ट्रस्ट
मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट बनाए जाने के सवाल पर सैयद मोहम्मद शुऐब ने कहा कि अभी ऐसा कोई ट्रस्ट नहीं बनाया गया है। हालांकि उन्होंने बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा होने से इनकार नहीं किया।
24 को प्रस्तावित बोर्ड की बैठक में जमीन लेने पर मुहर लगने की उम्मीद
सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी पहले ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन स्वीकार करने की मंशा जाहिर कर चुके हैं। उस वक्त उन्होंने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल न करने का भी निर्णय लिया था और नवंबर में बोर्ड की बैठक बुलाकर इस पर मुहर भी लगवा ली थी।
अब अयोध्या में मस्जिद के लिए जमीन चिह्नित होने के बाद बोर्ड ने 24 फरवरी को सदस्यों की बैठक बुलाई है। बोर्ड के कुल 11 सदस्यों में मौजूदा समय में चेयरमैन जुफर फारूकी को मिलाकर आठ सदस्य हैं। इनमें मोहम्मद जुनीद सिद्दीकी सरकार की ओर से मनोनीत हैं।
वहीं विधायक अबरार अहमद के अलावा अदनान फर्रुख शाह, जुनैद सिद्दीकी, सैयद अहमद अली बोर्ड में शामिल हैं। ये सभी चेयरमैन के भरोसेमंद माने जा रहे हैं। दो सदस्य इमरान माबूद खान और अब्दुल रज्जाक खान बार काउंसिल से हैं। ये दोनों जमीन लेने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में बोर्ड अध्यक्ष की मंशा के मुताबिक जमीन लेने के निर्णय पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।
24 को प्रस्तावित बोर्ड की बैठक में जमीन लेने पर मुहर लगने की उम्मीद
सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी पहले ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन स्वीकार करने की मंशा जाहिर कर चुके हैं। उस वक्त उन्होंने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल न करने का भी निर्णय लिया था और नवंबर में बोर्ड की बैठक बुलाकर इस पर मुहर भी लगवा ली थी।
अब अयोध्या में मस्जिद के लिए जमीन चिह्नित होने के बाद बोर्ड ने 24 फरवरी को सदस्यों की बैठक बुलाई है। बोर्ड के कुल 11 सदस्यों में मौजूदा समय में चेयरमैन जुफर फारूकी को मिलाकर आठ सदस्य हैं। इनमें मोहम्मद जुनीद सिद्दीकी सरकार की ओर से मनोनीत हैं।
वहीं विधायक अबरार अहमद के अलावा अदनान फर्रुख शाह, जुनैद सिद्दीकी, सैयद अहमद अली बोर्ड में शामिल हैं। ये सभी चेयरमैन के भरोसेमंद माने जा रहे हैं। दो सदस्य इमरान माबूद खान और अब्दुल रज्जाक खान बार काउंसिल से हैं। ये दोनों जमीन लेने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में बोर्ड अध्यक्ष की मंशा के मुताबिक जमीन लेने के निर्णय पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।