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Lucknow News: अपहृत डॉक्टर का सुराग नहीं, एक करोड़ के लेनदेन का पता चला
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अपहृत डॉक्टर का सुराग नहीं, एक करोड़ के लेनदेन का पता चला
गुडंबा। मड़ियांव निवासी डॉक्टर सत्यरत्न के अपहरण के मामले में पुलिस अब तक उनका सुराग नहीं लगा सकी है। पुलिस के अनुसार, जांच में नौकरी लगवाने के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की बात सामने आई है। लापता होने के दिन सत्यरत्न को चार लोगों को नियुक्ति पत्र देने थे। पुलिस लेनदेन से जुड़े विवाद के पहलू की भी जांच कर रही है।
इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा के अनुसार, सत्यरत्न राम मनोहर लोहिया अस्पताल समेत विभिन्न सरकारी संस्थानों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लोगों से रुपये लेते थे। नियुक्ति पत्र देने के बाद जॉइनिंग से पहले कोई न कोई बहाना बनाकर अभ्यर्थियों को टाल देते थे। जांच में अब तक कई लोगों से एक करोड़ रुपये से अधिक रकम लेने की बात सामने आई है। आजमगढ़ निवासी आरएम राय की बहन से भी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में नौकरी लगवाने के नाम पर 7.50 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है।
सत्यरत्न की पत्नी डॉ. शिप्रा यादव की तहरीर पर दर्ज एफआईआर की जांच में पुलिस को शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और तकनीकी साक्ष्यों में अंतर मिला है। सत्यरत्न की पूरे दिन की लोकेशन हजरतगंज में नहीं मिली। वहीं, नामजद प्रखर पांडेय के खाते से उसी दिन सत्यरत्न के खाते में 17 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर होने की जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, प्रखर पांडेय से भी सरकारी नौकरी के नाम पर रुपये लिए गए हैं। एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि अब तक की जांच में नौकरी के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक लेने की बात सामने आई है। फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सत्यरत्न का मोबाइल बंद है।
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इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा के अनुसार, सत्यरत्न राम मनोहर लोहिया अस्पताल समेत विभिन्न सरकारी संस्थानों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लोगों से रुपये लेते थे। नियुक्ति पत्र देने के बाद जॉइनिंग से पहले कोई न कोई बहाना बनाकर अभ्यर्थियों को टाल देते थे। जांच में अब तक कई लोगों से एक करोड़ रुपये से अधिक रकम लेने की बात सामने आई है। आजमगढ़ निवासी आरएम राय की बहन से भी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में नौकरी लगवाने के नाम पर 7.50 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है।
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सत्यरत्न की पत्नी डॉ. शिप्रा यादव की तहरीर पर दर्ज एफआईआर की जांच में पुलिस को शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और तकनीकी साक्ष्यों में अंतर मिला है। सत्यरत्न की पूरे दिन की लोकेशन हजरतगंज में नहीं मिली। वहीं, नामजद प्रखर पांडेय के खाते से उसी दिन सत्यरत्न के खाते में 17 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर होने की जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, प्रखर पांडेय से भी सरकारी नौकरी के नाम पर रुपये लिए गए हैं। एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि अब तक की जांच में नौकरी के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक लेने की बात सामने आई है। फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सत्यरत्न का मोबाइल बंद है।
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