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Lucknow News: कॉलेजों में स्नातक चौथे वर्ष में कोई आवेदन नहीं

Mon, 30 Sep 2024 07:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Mon, 30 Sep 2024 07:17 PM IST
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No applications in fourth year graduation in colleges
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक कोर्स में दाखिले के लिए किसी भी विद्यार्थी ने रुचि नहीं दिखाई है। आलम यह है कि यहां किसी भी डिग्री कॉलेज में चौथे साल की पढ़ाई के लिए एक भी आवेदन नहीं मिला है। राजधानी लखनऊ में चार राजकीय 20 अनुदानित और नगर निगम डिग्री कॉलेज के साथ बड़ी संख्या में स्ववित्तपोषित कॉलेज हैं।
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शिक्षाविदों के मुताबिक, स्नातक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम में दाखिला न लेने के पीछे जो सबसे बड़ी वजह सामने आ रही है, वह है छात्र का भ्रमित होना। इसे लेकर उसके मन में तमाम सवाल हैं, जिसके बारे में उसे कोई समझाने वाला नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्नातक कोर्स को चार वर्षीय पाठ्यक्रम के तौर पर डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थी को एक बेहतर रिसर्चर बनाने के साथ ही शोध की गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा देना है। हालांकि विद्यार्थी को मल्टीपल एंट्री व एग्जिट की सुविधा भी इसमें है। छात्र चाहे तो तीसरे वर्ष में साधारण स्नातक की डिग्री लेकर कोर्स से मूव कर सकता है। वहीं चौथे साल में यूजी विद रिसर्च की डिग्री मिलेगी।
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75 प्रतिशत अंक प्रवेश का आधार
एनईपी के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालय में स्नातक चौथे साल में दाखिले के लिए 7.5 सीजीपीए (75 प्रतिशत) अंक लाना अनिवार्य है। इसके बाद ही विद्यार्थी इसमें प्रवेश लेने के पात्र होंगे। हालांकि अंतिम वर्ष में 7.5 सीजीपीए लाने वाले छात्रों की संख्या करीब 20 प्रतिशत ही है। इसके बावजूद विद्यार्थियों का चौथे वर्ष में दाखिला न लेने की इच्छा बताती है कि उनमें जागरूकता की कमी है।
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पीएचडी में सीधे प्रवेश का मौका
चार वर्षीय स्नातक करने के बाद विद्यार्थी के पास सीधे पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने का अवसर होगा। इसके लिए परास्नातक करने की बाध्यता नहीं होगी। जबकि जो विद्यार्थी पीएचडी में दाखिला न लेना चाहें तो वह एक वर्षीय परास्नातक कोर्स में भी दाखिला ले सकते हैं।



हर समस्या का करेंगे समाधान
कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक में आवेदन न आना या कम संख्या में आना, इस बात का संकेत है कि छात्र को इस बारे में जानकारी का अभाव होना है। एनईपी, छात्रों के सर्वोत्तम विकास की योजना के साथ शुरू की गई नीति है। चूंकि पहली बार इस तरह की व्यवस्था शुरू हुई है। इसलिए ऐसा हुआ है। साल दर साल प्रवेश के आंकड़ों में वृद्धि होगी। अगर किसी छात्र कोई भी भ्रम है तो वह सीधे डीन एकेडमिक्स से संपर्क कर सकता है। उसकी पूरी मदद की जाएगी।
- प्रो. गीतांजलि मिश्रा, डीन एकेडमिक्स लविवि
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