लखनऊ आया नीति आयोग, सीएम के साथ मिलकर तैयार किया यूपी के लिए 'डेवलपमेंट प्लान'
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उत्तर प्रदेश पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं पिछड़ा है। मातृ, शिशु और बच्चों की मृत्यु दर भी चिंताजनक है। लखनऊ पहुंचे नीति आयोग के उपाध्यक्ष समेत सभी सदस्यों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उनकी टीम की चर्चा के दौरान पेश किए गए आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया।
बुधवार को नीति आयोग और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ पांच घंटे चली बैठक के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ लोक भवन में मीडिया से मुखातिब हुए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 10 फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा गया है। यह वर्तमान में 7.9 फीसदी है। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को बताया कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार जल्द ही नई औद्योगिक नीति लाएगी। नियमों और प्रक्रिया को सरल कर सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा। इंस्पेक्टर राज पूरी तरह से खत्म होगा। कर सुधार जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
यूपी की इन दिक्कतों का सीएम ने किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किए जाने की जरूरत है। वर्तमान में यहां मातृ मृत्यु दर प्रति लाख 285, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 64 और शिशु मृत्यु दर 50 है।
इसी तरह 12-23 माह के बच्चों में पूर्ण प्रतिरक्षण (प्रतिरोधक क्षमता) की दर भी महज 22.7 प्रतिशत है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर 70 और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 25 तक लाई जाए। वहीं पूर्ण प्रतिरक्षण तो शत-प्रतिशत लाना है।
मौजूदा समय में साक्षरता की दर 67.68 फीसदी है। पुरुष साक्षरता की दर जहां 77.28 प्रतिशत है, वहीं महिला साक्षरता की दर 57.18 प्रतिशत है। हमारा लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक बालक-बालिकाओं के लिए मुफ्त, एक समान और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की व्यवस्था की जाए।
गांवों से पलायन रोकने के लिए वहां मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जाएगा। कौशल उन्नयन के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। बुंदेलखंड और प्रदेश के मध्य एवं पश्चिमी क्षेत्रों में गिरता हुआ जलस्तर चिंता का विषय है।
हर किसी के लिए पीने का साफ पानी उपलब्ध कराना प्राथिमिकता
प्रत्येक व्यक्ति के लिए साफ पीने का पानी उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। भूगर्भ जल के बजाय सतह पर उपलब्ध पानी के इस्तेमाल पर ज्यादा ध्यान देंगे।
सीएम ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को बुंदेलखंड से जोड़ा जाएगा। बुंदेलखंड में लैंड बैंक बनाकर वहां उद्योग लगाए जाएंगे। वहां अन्ना प्रथा को खत्म करने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
सभी स्तरों पर नीति आयोग से मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के सदस्यों से कहा कि प्रदेश के संसाधन सीमित हैं। ऐसे में निरंतर विकास के लिए सभी स्तरों पर केंद्र सरकार से सहयोग की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 250-499 तक आबादी वाली बसावटों को पक्के मार्गों से जोड़ने की जरूरत है। इस पर आयोग ने आश्वासन दिया कि यूपी के विकास में संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
हर पांच साल पर होगा बीपीएल सर्वे
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का बीपीएल परिवारों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वर्तमान में जिस सर्वेक्षण के आधार पर काम किया जा रहा है, वह काफी पुराना होने के कारण हकीकत से परे है। मुख्यमंत्री ने नीति आयोग को सुझाव दिया कि प्रत्येक पांच साल में बीपीएल सर्वे कराया जाए। इस पर दोनों पक्षों में सहमति बनी।
बुंदेलखंड पैकेज की बढ़ेगी अवधि
नीति आयोग को बताया गया कि बुंदेलखंड पैकेज की अवधि खत्म हो चुकी है, पर वहां समग्र विकास के लिए अभी काफी काम कराए जाने हैं। इसलिए इस पैकेज को बढ़ाने की जरूरत है। इस पर नीति आयोग का रुख काफी सकारात्मक रहा।
प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में खारे पानी और आर्सेनिक व फ्लोराइड प्रभावित जल समस्या के स्थायी समाधान के लिए सतह पर आधारित ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के लिए भी नीति आयोग का सहयोग मांगा गया।
हालात से पार पाने को रोडमैप बनाएगा कार्यकारी ग्रुप
बैठक में गहन विचार-विमर्श के बाद सूबे की विषम स्थितियों से पार पाने के लिए पांच सदस्यी संयुक्त कार्यकारी ग्रुप बनाने का फैसला किया गया।
इसमें नीति आयोग की ओर से सदस्य डॉ. रमेश चंद्र, सीईओ अमिताभ कांत और प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव नियोजन रहेंगे। यह ग्रुप सभी विभागों के लिए कार्यवाही के बिंदु तय करेगा। इसके रोडमैप पर सभी विभाग अमल करेंगे।