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Lucknow News: कंट्रोल रूम से लारी में आसान होगी रात की राह
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लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग।
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग में अब मरीजों को रात के समय इलाज संबंधी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए रात में एक कंट्रोल रूम स्थापित करने का फैसला किया है। इसकी निगरानी वरिष्ठ डॉक्टर करेंगे।
विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि दिन में मरीज और उनके तीमारदार आसानी से वरिष्ठ डॉक्टरों और अन्य अधिकारियों से अपनी समस्या बता पाते हैं। विभाग की इमरजेंसी में 24 घंटे में 150 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मरीज रात आठ से सुबह सात बजे के बीच आते हैं। बाकी 40 प्रतिशत मरीज दिन के समय आते हैं। रात में इलाज के लिए चुनिंदा वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी ही उपलब्ध रहते हैं। इसे देखते हुए कंट्रोल रूम स्थापित करने का फैसला किया गया है।
पूरा स्टाफ होगा अलग
विभागाध्यक्ष ने बताया कि सामान्य रूप से ड्यूटी चार्ज महीने के हिसाब से बनाया जाता है। नई व्यवस्था में इमरजेंसी का स्टाफ अलग रखकर बाकी में रोटेशन लागू होगा। लारी में कई बार रात के समय हंगामा-बवाल की सूचना आती है। कंट्रोल रूम के जरिये इस पर रोक लगेगी। कंट्रोल रूम में वरिष्ठ और कनिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी के साथ सोशल वर्कर भी तैनात होंगे। इनकी निगरानी डॉक्टर के हाथ में होगी और उसकी ड्यूटी सिर्फ प्रशासनिक काम के लिए ही होगी।
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विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि दिन में मरीज और उनके तीमारदार आसानी से वरिष्ठ डॉक्टरों और अन्य अधिकारियों से अपनी समस्या बता पाते हैं। विभाग की इमरजेंसी में 24 घंटे में 150 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मरीज रात आठ से सुबह सात बजे के बीच आते हैं। बाकी 40 प्रतिशत मरीज दिन के समय आते हैं। रात में इलाज के लिए चुनिंदा वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी ही उपलब्ध रहते हैं। इसे देखते हुए कंट्रोल रूम स्थापित करने का फैसला किया गया है।
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पूरा स्टाफ होगा अलग
विभागाध्यक्ष ने बताया कि सामान्य रूप से ड्यूटी चार्ज महीने के हिसाब से बनाया जाता है। नई व्यवस्था में इमरजेंसी का स्टाफ अलग रखकर बाकी में रोटेशन लागू होगा। लारी में कई बार रात के समय हंगामा-बवाल की सूचना आती है। कंट्रोल रूम के जरिये इस पर रोक लगेगी। कंट्रोल रूम में वरिष्ठ और कनिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी के साथ सोशल वर्कर भी तैनात होंगे। इनकी निगरानी डॉक्टर के हाथ में होगी और उसकी ड्यूटी सिर्फ प्रशासनिक काम के लिए ही होगी।
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