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आखिरी बार लखनऊ आकर दिल की बातें कह गए निदा फाजली

Mon, 08 Feb 2016 03:11 PM IST
आलोक पराड़कर/अमर उजाला, लखनऊ
आलोक पराड़कर/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 08 Feb 2016 03:11 PM IST
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nida fazli interview with amar ujala

मशहूर शायर निदा फाजली का सोमवार को निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। 29 जनवरी को लखनऊ महोत्सव में हुए मुशायरे में वह मौजूद थे। यहां उन्होंने अमर उजाला से की थी दिल की बातें। यहां है उनसे की गई बातचीत का अंश...

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शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद अमजद अली के बाद अब साहित्यकारों ने भी पद्म अलंकरणों में उपेक्षा का सवाल उठाया है। प्रसिद्ध शायर निदा फाजली ने कहा कि एक दौर था जब राजनेताओं के मित्रों में साहित्यकार शामिल होते थे।
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वे बहुत सारे साहित्यकारों को व्यक्तिगत तौर पर पहचानते थे, लेकिन आज के राजनेताओं को साहित्यकारों की जरूरत नहीं है। अपने एक दोहे को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि ‘क्रिकेट, नेता, एक्टर हर महफिल की शान, रद्दी में तुलने लगा गालिब का दीवान...’।
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निदा फाजली ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि पद्म अलंकरण में फिल्म और खेल के लोगों को तो तरजीह दी जाती है लेकिन साहित्यकारों की राजनेता उपेक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ इन अलंकरणों की बात नहीं है, सरकार हवाई अड्डों के नाम राजनेताओं, राजा, महाराजाओं के नाम पर तो रखती है लेकिन उस क्षेत्र के साहित्यकारों की अनदेखी की जाती है। हालांकि प्रसिद्ध शायर ने इस उपेक्षा का कारण भी खुद ही बताया।

...तब मेरे पास लौटाने के लिए कुछ नहीं होगा

nida fazli interview with amar ujala

उन्होंने एक शेर को उद्धृत करते हुए कहा, ‘हुई मुद्दत कि गालिब मर गया पर याद आता है, वो हर एक बात पे कहना कि यूं होता तो क्या होता...’। लेखक हमेशा ‘यूं होता’ और ‘क्या’ की बात करता है।

वह हमेशा सवाल पूछता है। इसलिए राजनेता साहित्यकारों से डरते हैं। उन्होंने कहा कि नेहरू जैसे राजनेताओं के कई साहित्यिक मित्र थे। ‘खोया हुआ सा कुछ’ के लिए 1998 में साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित निदा फाजली ने यह पूछे जाने पर कि आपने यह सम्मान क्यों नहीं लौटाया तो उन्होंने कहा कि मैंने यह सोचकर सम्मान नहीं लौटाया कि अगर नाराज होकर एक बार सम्मान लौटा दूंगा तो अगली बार अपने विरोध के लिए क्या करूंगा तब मेरे पास लौटाने के लिए कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मैंने अपने विरोध के लिए कलम को चुना है।

कई लोकप्रिय गीत लिख चुके फाजली ने यह पूछे जाने पर वे इन दिनों फिल्मों में गीत क्यों नहीं लिख रहे तो उन्होंने कहा कि मेरे लिए लिखने के कई माध्यम हैं, जहां मन लगता है वहीं लिखता हूं।

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