चुनाव के बाद मनरेगा मजदूर बन जाएंगे टीचर?
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मनरेगा मजदूर और स्कूल टीचर का यूं तो कोई जोड़ नहीं, लेकिन पंचायत चुनाव जो न करा दे। प्रत्याशी आसमान से तारे तोड़ लाने सरीखे वादे कर रहे हैं।
लखनऊ के बीकेटी के वार्ड नंबर-5 से एक प्रत्याशी ने तो एलान ही कर दिया कि अगर वे जीते तो हर मनरेगा मजदूर को टीचर बनवा देंगे। चौंकाने वाला घोषणाओं का ये लॉलीपाप और जायकेदार तब हो जाता है जब उसमें हर घर से एक को सरकारी नौकरी का फ्लेवर भी जुड़ जाता है।
अपनी पत्नी के लिए गलियों में प्रचार कर चुके प्रत्याशी पति का ये भी दावा है कि चुनावों की ही तरह सबको पांच सालों की नौकरी की गारंटी दी जाएगी।
हर पक्के 20 बीघा जमीन पर सबमर्सिबल पंप समेत तमाम मांगों का उनका लंबा चौड़ा पोस्टर पहाड़पुर चौराहे से गुजरने वाले ठिठक कर पढ़ते लोग बृहस्पतिवार शाम तक भी दिखे।
इलाके के अमित शुक्ला, राकेश की मानें तो दावों में कोई दम नहीं है, लेकिन जिन्हें जानकारी नहीं वे दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हां, दावेदारी इससे मजबूत हुई है।
चुटकी बजाते लग गया ट्रांसफॉर्मर
एक पुल को लेकर सियासत का अजीब रूप नवरंगपुर-मलूकपुर में देखा जा रहा है। यहां बेलवा नाले पर करीब 50-60 फीट लंबे लकड़ी के पुल पर सियासत का मुख्य मुद्दा टिका है। चुनावों के दोनों ही पदों के प्रत्याशी यहां जीतते ही नाले पर स्थायी पुल बनवाने का दावा कर रहे हैं।
यही नहीं पुल के दोनों ओर ईंटों के चट्टे सजा दिए गए हैं ताकि दावे ओरिजिनल लगें। यकीन दिला सकें। मलूकपुर के गुड्डू, खेलावन ने बताया कि तीन-चार दिनों से पुल की खूब चर्चा है। लाखन और मीना ने बताया कि 1995 में पहली बार पक्का बना था, उसके बाद टूट गया।
तब से हर दूसरे तीसरे साल गांव वाले ही चंदे से इसे बनवाते हैं। बाकी जब चुनाव आता है तो प्रत्याशी लंबे वादे कर निर्माण सामग्री गिरवा देते हैं। ऐसा लगता है कि बस नतीजा आते ही पुल बन जाएगा। देखो इस बार फिर सजा है। सीतापुर के दर्जनों गांव और लखनऊ के गांवों को जोड़ने वाले जमखनवां नाले पर पुल बनने का भी इंतजार जारी है।
9 अक्तूबर को इलाके में जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी के वोट पड़ रहे हैं और एक दिन पहले ही जमखनवा के नजदीक का मजरा दूघर दिनदहाड़े रोशन हो रहा था। गांव में प्रत्याशियों के जमावड़े के बीच बिजली के तार खींचे जा रहे थे, ट्रांसफॉर्मर लग रहे थे।
ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लादकर गांव में बिजली के खंभे ढोए जा रहे थे। प्रत्याशियों से ही पूछा तो सबके पास रटा रटाया जवाब था-लोहिया ग्राम है काम तो चलता ही रहता है। गांव के मूलचंद समेत कई ने बताया कि इधर कुछ दिनों से काम में तेजी आई है।