लखनऊ मेट्रो का नया रूट चार्ट होगा तैयार, इन इलाकों में चलेगी मेट्रो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नार्थ साउथ कॉरिडोर के बाद मेट्रो रेल के अन्य रूटों को लेकर कराई जा रही टेक्नोफिजीबिलिटी की शुरुआती रिपोर्ट आ गई है। इसका एक प्रस्तुतिकरण एलएमआरसी के अधिकारियों के समक्ष कर भी दिया गया है। जिसमें शुरुआती रूट्स और उन पर कितने यात्री मिलेंगे ये जानकारी दी गई है।
एलएमआरसी की ओर से इस जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है। मगर माना जा रहा है कि, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को तो हरी झंडी दी ही जाएगी। इसके साथ में सबसे पहले रिंग लाइन मेट्रो चलाने की शुरुआत होगी।
जिससे सीजी सिटी और कई नई कॉलोनियों को जोड़ा जा सकेगा। इसके अलावा पॉलीटेक्निक चौराहे से हाईकोर्ट कैंपस को नार्थ-साउथ कॉरिडोर से जोड़े जाने का फैसला भी बहुत जल्द किये जाने की संभावना है। ऐसे में पुराना शहर, सीजी सिटी और न्यू हाईकोर्ट मेट्रो का अगला पड़ाव होगा।
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव और निदेशक दलजीत सिंह ने बताया कि इस टेक्नोफिजीबिलिटी रिपोर्ट को बनाने काम पिछले साल डीएमआरसी ने शुरू किया था। 56 किलोमीटर के इस रूट की रिपोर्ट बनाने के लिए डीएमआरसी को प्रदेश सरकार ने 2.80 करोड़ रुपये दिये थे।
इन रूटों पर मेट्रो चलाने की टेक्नोफिजीबिलिटी रिपोर्ट
ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से अमीनाबाद, पुराना लखनऊ होते हुए हरदोई रोड से बसंत कुंज तक),मिल एरिया लाइन (मवइया से राजाजीपुरम होते हुए विक्टोरिया स्ट्रीट से मेडिकल यूनिवर्सिटी चौराहे तक), रिंग लाइन (अमौसी एयरपोर्ट के पहले शहीद पथ पर 15 किमी लंबी लाइन फैजाबाद रोड से न्यू हाईकोर्ट), पॉलीटेक्निक चौराहा से न्यू हाईकोर्ट लिंक लाइन (न्यू हाईकोर्ट परिसर सीधे नार्थ-ईस्ट कॉरिडोर से जुड़ेगा)
शहीद पथ के दोनों ओर नई कॉलोनियों का बहुत तेजी से विकास अगले तीन साल में हो जाएगा। जिसमें एलडीए, आवास विकास परिषद, निजी कंपनियों के अलावा चक गजरिया सिटी को भी मेट्रो से जोड़ने की तैयारी है।
जिससे सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को और फायदेमंद बनाया जा सके। यहां आईटी सिटी, ट्रिपल आईटी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और ऐसे ही कई अन्य बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट हैं।
जबकि, लाखों लोग भविष्य में यहां निवास और नौकरी भी करेंगे। शहीद पथ पर मेट्रो रेल परियोजना सस्ती भी पड़ेगी क्योंकि, यहां जमीन नहीं खरीदनी पड़ेगी।