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अब पानी भी लगाएगा महंगाई में आग
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Thu, 10 Oct 2013 12:35 AM IST
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शहरों में यदि आप रहते हैं और जलकल विभाग से पानी लेते हैं तो अब पानी के लिए भी और अधिक जेब ढीली करने को तैयार हो जाएं।
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राज्य सरकार बिजली के बाद अब पानी की कीमतें बढ़ाने जा रही है। वह भी एक-दो फीसदी नहीं बल्कि दोगुने से ढाई गुने तक यह बढ़ोतरी होगी।
यही नहीं पानी का कनेक्शन के लिए कुल सात श्रेणीकरण तय की गई हैं। इसके मुताबिक जितना बड़ा मकान उतना अधिक वाटर टैक्स।
व्यावसायिक श्रेणी को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया है। व्यावसायिक टैक्स घरेलू से कई गुना अधिक होगा। स्थानीय निकाय निदेशालय ने संशोधित प्रस्ताव भेज दिया है।
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इसमें आगरा, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ व मथुरा में नई दरों का सुझाव है। बढ़ी दरें नई वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल 2014 से लिए जाने का सुझाव है।
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शहरी क्षेत्रों में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जलकल विभाग (पहले जल संस्थान) की स्थापना की गई है। प्रदेश में वाटर टैक्स की दरें वर्ष 2002 में तय की गई थीं।
नियमत: प्रत्येक पांच साल पर वाटर टैक्स की दरों में वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन 11 वर्षों में इन दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना की शर्तों के मुताबिक निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं। इसमें घरों में पानी का मीटर लगाने के साथ लागत मूल्य के बराबर हाउस टैक्स लिया जाना अनिवार्य है।
प्रदेश में वाटर टैक्स बढ़ाने की मशक्कत पिछले तीन सालों से चल रही है, लेकिन इसे अभी तक तय नहीं किया जा सका है। इसलिए स्थानीय निकाय निदेशालय ने संशोधित प्रस्ताव भेजा है।
इसमें तर्क दिया गया है कि पानी उत्पादन का काफी महंगा हो गया है। पानी उत्पादन के लिए बिजली, मजदूर और केमिकल की जरूरत होती है। इसलिए इसके आधार पर वाटर टैक्स में वृद्धि जरूरी है।
प्रस्ताव की खास बातें
वाटर टैक्स की दरें लागत के आधार पर तैयार की गई हैं। मकानों को कुल सात श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग वाटर टैक्स की दरें तय की गई हैं।
प्रस्तावित वाटर टैरिफ इस आधार पर तैयार किया गया है कि कुल पानी के खर्च में प्रति व्यक्ति 60 फीसदी पानी नहाने, धोने या फिर शौचालय में इस्तेमाल करता है।
केवल 40 फीसदी पानी खाने और पीने पर खर्च किया जाता है। इसलिए जितना बढ़ा घर होगा उससे उतना अधिक वाटर टैक्स लेने का सुझाव दिया गया है।