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Lucknow News: दर्द की नई दवाओं का साइड इफेक्ट कम और असर ज्यादा
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लखनऊ। सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया दी जाती है, लेकिन इसका असर खत्म होने के बाद उसे काफी दर्द होता है। दवाओं का डोज ज्यादा करने से मरीज को नुकसान होता है। अब ऐसी दवाएं आ गई हैं, जिनसे दर्द में राहत पहले से ज्यादा रहती है और साइड इफेक्ट कम होता है। केजीएमयू के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मोनिका कोहली ने यह जानकारी दी।
वह शनिवार को विभाग की ओर से आयोजित चार दिवसीय इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थिसियोलॉजीस्ट्स (आईसीए) के पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। प्रो. कोहली ने बताया कि नई दवाओं ने सर्जरी से पहले दी जाने वाली बेहोशी को भी अधिक सुरक्षित बनाया है। रेमीफेनटानिल दर्द में दी जाने वाली नई दवाई है। इसका प्रभाव काफी तेजी से होता है। यह इंजेक्शन के बाद मरीज को दर्द होने पर दी जाती है।
लोहिया संस्थान में एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास ने बताया कि आईसीयू-वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों की देखभाल बेहद अहम है। ये धीरे-धीरे रिकवर करते हैं, लेकिन इनकी प्रगति बहुत छोटे अंतराल पर जांचनी होती है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ इनकी प्रगति के साथ शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति, अंगों की कार्यक्षमता और उनकी मशीन पर निर्भरता का प्रतिशत तय करते हैं।
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वह शनिवार को विभाग की ओर से आयोजित चार दिवसीय इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थिसियोलॉजीस्ट्स (आईसीए) के पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। प्रो. कोहली ने बताया कि नई दवाओं ने सर्जरी से पहले दी जाने वाली बेहोशी को भी अधिक सुरक्षित बनाया है। रेमीफेनटानिल दर्द में दी जाने वाली नई दवाई है। इसका प्रभाव काफी तेजी से होता है। यह इंजेक्शन के बाद मरीज को दर्द होने पर दी जाती है।
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लोहिया संस्थान में एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास ने बताया कि आईसीयू-वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों की देखभाल बेहद अहम है। ये धीरे-धीरे रिकवर करते हैं, लेकिन इनकी प्रगति बहुत छोटे अंतराल पर जांचनी होती है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ इनकी प्रगति के साथ शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति, अंगों की कार्यक्षमता और उनकी मशीन पर निर्भरता का प्रतिशत तय करते हैं।
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