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Lucknow News: क्लीनिकल ट्रॉयल हाेने से नई दवा-उपकरण की होगी खोज
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लखनऊ। केजीएमयू के ब्राउन हाॅल में शुक्रवार को क्लीनिकल ट्रॉयल के विस्तार के लिए गोलमेज सम्मेलन हुआ। इसमें शामिल हुए 20 मेडिकल संस्थान के प्रतिनिधियों समेत अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में क्लीनिकल ट्रॉयल हाेने से नई दवा व उपकरणों की खोज होगी। इससे मरीजों को फायदा मिलेगा।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि प्रदेश में क्लीनिकल ट्रॉयल के स्वरूप को तय करने की जरूरत है। उनकी नीति निर्धारण व सीमाएं तय होनी चाहिए। क्लीनिकल ट्रॉयल किन-किन बीमारियों में जरूरत है, सबसे पहले इस दिशा में काम होना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि क्लीनिकल ट्रॉयल में फाॅर्मा कंपनियों की भूमिका अहम है। लिहाजा ऐसे नियम बनाए जाएं, जिससे फाॅर्मा कंपनियों के हितों का नुकसान न हो। मरीजों के भी हितों की रक्षा होनी चाहिए।
जम्मू एम्स के प्रेसीडेंट डॉ. वाईके गुप्ता ने कहा कि क्लीनिकल ट्रॉयल के नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि एथिकल क्लीयरेंस लेने में दिक्कत न आए। सेंट्रल बायो मेडिकल रिसर्च के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने कहा कि नई दवा का परीक्षण पहले जानवरों पर किया जाता है। इसमें दवा की पूरी डोज दी जाती है। जानवरों में सफलता के बाद इंसानों पर दवा का ट्रॉयल किया जाता है। उसके बाद ही दवा बाजार में उतारी जाती है। उन्होंने कहा कि नई दवा व आधुनिक उपकरणों की सख्त जरूरत है।
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कार्यक्रम में केजीएमयू डीन रिसर्च सेल डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा, विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा मन्नान अख्तर, डॉ. जीएन सिंह और डॉ. एके प्रधान समेत देश भर के विशेषज्ञ जुटे।
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केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि प्रदेश में क्लीनिकल ट्रॉयल के स्वरूप को तय करने की जरूरत है। उनकी नीति निर्धारण व सीमाएं तय होनी चाहिए। क्लीनिकल ट्रॉयल किन-किन बीमारियों में जरूरत है, सबसे पहले इस दिशा में काम होना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि क्लीनिकल ट्रॉयल में फाॅर्मा कंपनियों की भूमिका अहम है। लिहाजा ऐसे नियम बनाए जाएं, जिससे फाॅर्मा कंपनियों के हितों का नुकसान न हो। मरीजों के भी हितों की रक्षा होनी चाहिए।
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जम्मू एम्स के प्रेसीडेंट डॉ. वाईके गुप्ता ने कहा कि क्लीनिकल ट्रॉयल के नियम स्पष्ट होने चाहिए, ताकि एथिकल क्लीयरेंस लेने में दिक्कत न आए। सेंट्रल बायो मेडिकल रिसर्च के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने कहा कि नई दवा का परीक्षण पहले जानवरों पर किया जाता है। इसमें दवा की पूरी डोज दी जाती है। जानवरों में सफलता के बाद इंसानों पर दवा का ट्रॉयल किया जाता है। उसके बाद ही दवा बाजार में उतारी जाती है। उन्होंने कहा कि नई दवा व आधुनिक उपकरणों की सख्त जरूरत है।
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कार्यक्रम में केजीएमयू डीन रिसर्च सेल डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा, विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा मन्नान अख्तर, डॉ. जीएन सिंह और डॉ. एके प्रधान समेत देश भर के विशेषज्ञ जुटे।