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यूपी : थानों पर प्रभारियों की तैनाती के नए निर्देश जारी, आईजी या डीआईजी की मंजूरी पर होगी तैनाती
Fri, 09 Aug 2019 12:08 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 09 Aug 2019 12:08 AM IST
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थानों पर प्रभारियों की तैनाती को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत यह तय किया गया है कि जिले का कप्तान द्वारा प्रस्तावित सूची पर रेंज के आईजी या डीआईजी की संस्तुति के बाद ही तैनाती की जाएगी। निर्देशों में कहा गया है कि थाना प्रभारियों की प्रस्तावित सूची पर वे एक सप्ताह में अनुमोदन कर जिले के कप्तान को सूची वापस भेज देंगे।
निर्देशों के इस क्रम में जोन के एडीजी को यह जिम्मेदारी गई है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि तय मानकों और अनुमोदित सूची के अलावा किसी और को थाने का प्रभार न मिले। उन्हें हर महीने डीजीपी मुख्यालय को इसके लिए प्रमाण पत्र प्रेषित करना होगा।
डीजीपी ओपी सिंह ने इसके लिए सभी मातहत अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि तीन साल की सेवा पूरी करने वाले और 58 वर्ष की आयु तक के ही पुलिस कर्मी थाने के प्रभारी पद के लिए अर्ह होंगे। इसमें यह बाध्यता भी शामिल की गई है कि थाने का प्रभारी बनने वाले पुलिस कर्मी की सत्य निष्ठा पिछले पांच सालों में रोकी न गई हो और पिछले तीन वर्षों में उन्हें किसी किसी गंभीर प्रकृति का दंड अथवा प्रतिकूल प्रविष्टि न मिली हो।
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निर्देशों के इस क्रम में जोन के एडीजी को यह जिम्मेदारी गई है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि तय मानकों और अनुमोदित सूची के अलावा किसी और को थाने का प्रभार न मिले। उन्हें हर महीने डीजीपी मुख्यालय को इसके लिए प्रमाण पत्र प्रेषित करना होगा।
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डीजीपी ओपी सिंह ने इसके लिए सभी मातहत अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि तीन साल की सेवा पूरी करने वाले और 58 वर्ष की आयु तक के ही पुलिस कर्मी थाने के प्रभारी पद के लिए अर्ह होंगे। इसमें यह बाध्यता भी शामिल की गई है कि थाने का प्रभारी बनने वाले पुलिस कर्मी की सत्य निष्ठा पिछले पांच सालों में रोकी न गई हो और पिछले तीन वर्षों में उन्हें किसी किसी गंभीर प्रकृति का दंड अथवा प्रतिकूल प्रविष्टि न मिली हो।
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यह भी कहा गया है कि अगर किसी थाना प्रभारी को उसके पद से प्रत्यावर्तित किया जाता है तो उसे छह माह तक थाने का प्रभार न दिया जाए और अगर उसे प्रभार सौंपा जाना जरूरी पाया जाता है तो इसके कारणों के बारे में संबंधित आईजी या डीआईजी को अवगत करा कर उनकी संस्तुति ली जानी जरूरी होगी। यह भी तय किया गया है कि प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित पुलिस कर्मी को एक वर्ष तक थाने के प्रभारी के पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।
निर्देश दिए गए हैं कि रेज स्तर पर थाना प्रभारियों की सूची की जुलाई माह में समीक्षा की जाए। यह भी कहा गया है कि जिलों के कप्तान अगर किसी थाना प्रभारी को प्रत्यावर्तित करते हैं तो उन्हें संबंधित आईजी या डीआईजी को इसकी कारण सहित जानकारी देनी होगी।
डीजीपी ने इंसपेक्टर से लेकर सिपाहियों तक की थाने या चौकी पर दोबारा तैनाती न किए जाने के पूर्व के आदेश का कड़ाई से पालन करे जाने की ताकीद भी की है। डीजीपी ने कहा है कि अक्सर देखने में आता है कि जिलों के कप्तान बगैर किसी ठोस कारण के थाने के प्रभारियों को हटा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले कप्तानों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया जाएगा।
निर्देश दिए गए हैं कि रेज स्तर पर थाना प्रभारियों की सूची की जुलाई माह में समीक्षा की जाए। यह भी कहा गया है कि जिलों के कप्तान अगर किसी थाना प्रभारी को प्रत्यावर्तित करते हैं तो उन्हें संबंधित आईजी या डीआईजी को इसकी कारण सहित जानकारी देनी होगी।
डीजीपी ने इंसपेक्टर से लेकर सिपाहियों तक की थाने या चौकी पर दोबारा तैनाती न किए जाने के पूर्व के आदेश का कड़ाई से पालन करे जाने की ताकीद भी की है। डीजीपी ने कहा है कि अक्सर देखने में आता है कि जिलों के कप्तान बगैर किसी ठोस कारण के थाने के प्रभारियों को हटा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले कप्तानों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया जाएगा।