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डॉक्टर्स मना रहे थे न्यू ईयर, इलाज को तड़पा और मर गया मासूम!

Fri, 02 Jan 2015 09:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 02 Jan 2015 09:02 PM IST
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New born baby died in lack of treatment.

लोहिया अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही ने फिर एक नवजात की जान ले ली। बुधवार रात डॉक्टर नए साल की पार्टी में मशगूल थे। उसी दौरान मासूम की तबीयत बिगड़ी तो परिवारीजनों ने उसे लेकर इमरजेंसी से एनआईसीयू तक दौड़ लगाई, पर कोई डॉक्टर नहीं मिला। जब तक डॉक्टर आए, नवजात ने दम तोड़ दिया था।

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नाराज परिवारीजनों ने डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते इमरजेंसी के बाहर हंगामा करते हुए धरना दिया। बंथरा के आशीष द्विवेदी की पत्नी जया (26) को 29 दिसंबर की रात जुड़वा बच्चे हुए थे।
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बुधवार रात करीब नौ बजे एक बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिवारीजनों ने नर्स को बताया, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया। मासूम की हालत बिगड़ने लगी तो रात 11: 30 बजे इमरजेंसी भेज दिया गया। वहां भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। परिवारीजनों ने हंगामा किया तो पता चला कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर न्यू ईयर पार्टी में गए हैं।
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इसके बाद बच्चे को एनआईसीयू भेज दिया गया। रात करीब 12 बजे डॉक्टर पहुंचे और जांच की, लेकिन तब तक नवजात की मौत चुकी थी। बच्चे की मौत से नाराज परिवारीजन इमरजेंसी के बाहर शव लेकर रात तीन बजे तक धरने पर बैठे रहे। परिवारीजनों को उग्र होते देख डॉक्टर मौके से खिसक गए।

एनआईसीयू में क्यों नहीं किया भर्ती

New born baby died in lack of treatment.

अपने एक बच्चे की मौत के बाद बिलख रही मां जया ने बताया कि जुड़वा बच्चे होने पर डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को एनआईसीयू में भर्ती करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने लापरवाही की और एनआईसीयू में भर्ती नहीं किया। बुधवार रात बच्चे की तबीयत खराब होती गई। इसकी जानकारी भी दी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में तैनात कई डॉक्टरों को अचानक किसी मरीज को देखना पड़ जाए तो आनाकानी करते हैं। वे मरीज को देखने के बजाय उन्हें इलाज करने वाले डॉक्टर को ही दिखाने को कहते हैं। सूत्रों का मानना है कि इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। मुख्य इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने बच्चे को देखने से मना कर दिया। अगर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने मासूम को देख लिया होता तो उसकी जान बच सकती थी।

सरकार मरीजों को सुपर स्पेशलिटी इलाज देने की तैयारी कर रही है, लेकिन किसी मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो इमरजेंसी से डॉक्टर को बुलाने में आधा घंटा लग जाता है। डॉक्टर को इमरजेंसी से वार्ड में बुलाने के लिए रजिस्टर पर मरीज का पूरा विवरण लिखकर डॉक्टर के पास भेजा जाता है। डॉक्टर रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के बाद वार्ड पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट लग जाते हैं और यही देरी मरीजों की जान पर भारी पड़ जाती है।

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