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बीबीएयू का बैक्टीरिया बढ़ाएगा खाद्य उत्पादन
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बीबीएयू में विकसित बैक्टीरिया बढ़ाएगा पैदावार
पर्यावरण विज्ञान विभाग के शिक्षकों की खोज
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व डीन व डीन एकेडमिक प्रो. राणा प्रताप सिंह व शोधार्थी पवन मधेशिया ने एक ऐसा बैक्टीरिया विकसित किया है जो पैदावार बढ़ाएगा।
इन्होंने स्थानीय खेतों से जीवाणु लेकर उनसे एक विशिष्ट बैक्टीरिया ‘स्यूडोमोनास और बैसिलस’ की स्थानीय प्रजातियों की मदद से बैक्टीरिया विकसित किया है, जो कम उर्वरा शक्ति वाली जमीन में सुगंधित पौधों जैसे खस, रोसा घास, नींबू घास, जावा घास की उपज में वृद्धि करता है। साथ ही यह जमीन की उर्वरा शक्ति, सूक्ष्मजीव पोषण क्षमता व कार्बन स्थिरीकरण की ताकत में भी वृद्धि करता है। इन जीवाणुओं की मदद से किसान अधिक पैदावार ले सकेंगे।
प्रो. सिंह ने कहा कि जिन किसानों की जमीन उपजाऊ नहीं है और वह इस विशिष्ट बैक्टीरिया का प्रयोग करना चाहते हैं वे विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग संकाय से इसे निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। यह बैक्टीरिया उन्हें तरल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक अन्य शोधार्थी रोली मिश्र ने औषधीय पौधे मुलेठी के साथ स्टीविया, मिर्च और भिंडी की भी पैदावार बढ़ाने का तरीका ढूंढा है। इसके तहत सूखे-पथरीले क्षेत्रों से अलग किए गए जीवाणु व फफूंद खेतों में डाले गए हैं, जिससे उनकी उर्वरा शक्ति बढ़ी है।
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पर्यावरण विज्ञान विभाग के शिक्षकों की खोज
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व डीन व डीन एकेडमिक प्रो. राणा प्रताप सिंह व शोधार्थी पवन मधेशिया ने एक ऐसा बैक्टीरिया विकसित किया है जो पैदावार बढ़ाएगा।
इन्होंने स्थानीय खेतों से जीवाणु लेकर उनसे एक विशिष्ट बैक्टीरिया ‘स्यूडोमोनास और बैसिलस’ की स्थानीय प्रजातियों की मदद से बैक्टीरिया विकसित किया है, जो कम उर्वरा शक्ति वाली जमीन में सुगंधित पौधों जैसे खस, रोसा घास, नींबू घास, जावा घास की उपज में वृद्धि करता है। साथ ही यह जमीन की उर्वरा शक्ति, सूक्ष्मजीव पोषण क्षमता व कार्बन स्थिरीकरण की ताकत में भी वृद्धि करता है। इन जीवाणुओं की मदद से किसान अधिक पैदावार ले सकेंगे।
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प्रो. सिंह ने कहा कि जिन किसानों की जमीन उपजाऊ नहीं है और वह इस विशिष्ट बैक्टीरिया का प्रयोग करना चाहते हैं वे विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग संकाय से इसे निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। यह बैक्टीरिया उन्हें तरल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक अन्य शोधार्थी रोली मिश्र ने औषधीय पौधे मुलेठी के साथ स्टीविया, मिर्च और भिंडी की भी पैदावार बढ़ाने का तरीका ढूंढा है। इसके तहत सूखे-पथरीले क्षेत्रों से अलग किए गए जीवाणु व फफूंद खेतों में डाले गए हैं, जिससे उनकी उर्वरा शक्ति बढ़ी है।
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