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सीनियर ने तिलक लगाकर जूनियर का स्वागत किया

Sat, 03 Aug 2019 12:05 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2019 12:05 AM IST
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new batch for mbbs has start in kgmu
हिमाशु फोटो कुलदीप सिंह केजीएमयू में एमबीबीएस व बीडीएस के नए सत्र में उपस्थित छात्र व डाक्टर
लखनऊ। केजीएमयू एमबीबीएस का नया बैच बृहस्पतिवार को कैंपस आया तो उन्हें सीनियरों की रैगिंग का डर सता रहा था। लेकिन नए मेडिकोज का डर उस समय काफूर हो गया जब कलाम सेंटर में स्थित छठे तल पर कमरा खुलते ही सीनियर छात्रों ने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। छात्रों ने ऐसे माहौल की उम्मीद भी नहीं की थी।
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किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को नए शैक्षिक सत्र की शुरूआत हो गई। बाउंसर की सुरक्षा के बीच हॉस्टल से निकलकर कलाम सेंटर की बढ़ते हुए मेडिकोज काफी सहमे नजर आ रहे थे। हालांकि शिक्षकों ने उन्हें बता रखा था कि वह बेखौफ होकर पढ़ाई करें, सभी शिक्षक व कर्मी उनके सहयोग के लिए हैं। सीनियर के स्वागत के बाद अभिभावकों ने भी तालियों से उनका स्वागत किया तो उनके भीतर की झिझक निकल गई। कलाम सेंटर से बाहर निकले हुए छात्रों के चेहरे पर बिखरी मुस्कान बता रही थी कि उन्हें कैंपस का माहौल रास आने लगा है।
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केजीएमयू का इतिहास बताया
शैक्षिक सत्र के पहले दिन कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने छात्रों को केजीएमयू का गौरवशाली इतिहास बताया। स्लाइड शो से कुलपति ने छात्र-छात्राओं को बताया कि 1905 में बना यह ऐतिहासिक मेडिकल कॉलेज बाद में किस प्रकार विवि बना और मील के पत्थर स्थापित किए। कुलपति ने अपील की कि वे भी चिविवि की प्रसिद्धि को और आगे बढ़ाएं और संस्थान का नाम रोशन करें।
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पहला बैच आर्मी में गया
कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि केजीएमयू का पहला बैच 1911 में निकला था। उस वक्त यहां पर एमबीबीएस की 31 सीटें हुआ करती थीं। ब्रिटिश सरकार ने यहां से निकले डॉक्टरों को आर्मी में ले लिया था। उस वक्त ब्रिटिश सैनिकों के जख्मी होने पर उनके इलाज के लिए पूरा बैच गया था।
रात 10 बजे के बाद बंद रखें मोबाइल
गत वर्षों में मोबाइल द्वारा रैगिंग की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य डॉ. नरसिंह वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि छात्र रात 10 बजे के बाद अपने मोबाइल बंद कर लें। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से मोबाइल पर रैगिंग होने की संभावना समाप्त हो जाएगी। छात्र-छात्राएं जरूरत होने पर ही अपना फोन ऑन करें अन्यथा सवेरे ही मोबाइल चालू करें।
सीनियर ने मेडिकोज को पहनाया एप्रेन
केजीएमयू के सीनियर डॉक्टरों ने नई परंपरा डालते हुए मेडिकोज को एप्रेन पहनाकर उनका स्वागत किया। इसे व्हाइट कोट सेरेमनी का नाम दिया गया था।
एंटी रैगिंग स्क्वॉयड कमेटी बनी
केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने नए छात्रों को आगाह किया कि विवि में रैगिंग को रोकने के लिए एंटी रैगिंग स्क्वॉयड कमेटी, प्रॉक्टोरियल बोर्ड, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, अधिष्ठाता चिकित्सा संकाय एवं अधिष्ठाता दंत संकाय हैं। इसके अलावा कुलपति कार्यालय में भी छात्र रैगिंग की शिकायत कर सकते हैं।
पिता की उम्मीद पर खरे उतरे बेटे, एमबीबीएस में मिला दाखिला
अभावों में दिलाई बेटे को शिक्षा
सूरज पाल, पिता महेश चंद्र जिला कासगंज
मेडिकोज सूरज पाल के पिता महेश चंद्र ने अभावों में रहकर बेटे को पढ़ाया। महेश चंद्र बताते हैं कि उनका सिलाई का छोटा से कारोबार है। इंटर पास करने के बाद बेटे को कोचिंग कराई। पहले प्रयास में बेटे ने परीक्षा पास कर ली। मेरी उम्मीद की बेटे ने लाज रख ली।
बेटे में जुनून था डॉक्टर बनने का
राहुल यादव, पिता राजकुमार, लखनऊ
आरडीएसओ कर्मी राजकुमार कहते हैं कि बेटे के मन में बचपन से ही डॉक्टर बनने का जुनून था। ताकि गरीब-असहाय मरीजों की मदद कर सके। बेटे ने कड़ी मेहनत की। खुद अभावों में रहकर बेटे को कोचिंग कराई। दूसरे प्रयास में बेटे ने परीक्षा पास कर ली।
गरीब मरीजों की सेवा है मकसद
ईशान सैनी, बुलंदशहर
मरीजों की सेवा की खातिर इस पेशे में आया हूं। मेरा मकसद अपने जिले में गरीब मरीजों का उपचार करना है। मेरे किसान पिता सूरजभान ने कड़ी मेहनत से पैसा बचाकर मुझे पढ़ाया। वे शुरूआत से इस पेशे में आने को कहते थे। पिता से किया वादा पूरा करूंगा।
मेरी सफलता में पिता का योगदान
अभिषेक भारतीय सुमन, चंदौली
पिता मुन्ना भारतीय आरपीएफ में हेड कांस्टेबल है। उन्होंने डॉक्टरी पेशे में जाने के लिए हमेशा प्रेरित किया। परीक्षा के लिए दो साल तक तैयारी की। इसके बाद परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ। पिता की काउंसलिंग व कड़ी मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचा हूं।

पिता का सपना हुआ पूरा
अरुण कुमार श्रीवास्तव
पिता रामचरण श्रीवास्तव शिक्षक थे। वह हमेशा चाहते थे कि उनका एक बेटा इंजीनियर व दूसरा डॉक्टर बने। बड़ा भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पिता की मृत्यु के बाद आर्थिक दिक्कतें आईं। मां ने छोटी दुकान खोलकर पढ़ाया। कोचिंग की फीस भरी। मैंने अपने पिता का सपना का पूरा किया है। अब डॉक्टर बन मरीजों की सेवा करूंगा।
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