फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   new ambulance policy implemented in up

108 एम्बुलेंस संचालन के लिए नई गाइडलाइन को मंजूरी, इस तरह होगा चयन

Wed, 19 Dec 2018 01:23 AM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Wed, 19 Dec 2018 01:23 AM IST
विज्ञापन
new ambulance policy implemented in up
एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट ने 108 एम्बुलेंस सेवा के संचालन के लिए नए सेवा प्रदाता के चयन के लिए नई गाइडलाइन को मंजूरी दे दी। इस बार प्रदेश को दो हिस्सों पूर्वी व पश्चिमी कलस्टर में बांटकर एम्बुलेंस सेवा का संचालन होगा। बिड सिक्योरिटी के रूप में पूर्वी कलस्टर के लिए 2.29 करोड़ रुपए और पश्चिमी कलस्टर के लिए 1.14 करोड़ रुपए की धनराशि जमा करनी होगी।

विज्ञापन


शासन के सूत्रों के अनुसार चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की 108 एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत 2200 एम्बुलेंस की फ्लीट को पांच वर्ष तक चलाने के लिए निजी सेवा प्रदाता फर्म का अनुबंधित किया जाना है।
विज्ञापन


इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर पर कॉल रिसीव करने और एम्बुलेंस को भेजने के लिए जरूरी उपकरणों और मानव संसाधन में इस प्रकार बढ़ोत्तरी की जाएगी कि प्रति 10 एम्बुलेंस पर एक सीट का अनुपात रहे। निविदादाता कंपनी, सोसायटी, ट्रस्ट, संस्था जो किसी वैध अधिनियम के अंतर्गत भारत या भारत के बाहर गठित होगी, वह इस टेंडर में शामिल हो सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रति एम्बुलेंस प्रतिमाह निर्धारित शुल्क, न्यूनतम पांच फेरे प्रतिदिन व न्यूनतम 120 किलोमीटर प्रतिदिन प्रति एम्बुलेंस फ्लीट के औसत के आधार पर होगा। सेवा प्रदाता से कॉल का जवाब न देने पर पांच हजार रुपए का आर्थिक दंड लिया जाएगा।

गौरतलब है अखिलेश सरकार ने प्रदेश में 108 और 102 एम्बुलेंस का संचालन जीवीके ईएमआरआई कंपनी को दिया था। भाजपा सरकार के आने के बाद से ही नया टेंडर किए जाने की कवायद चल रही थी। 

अब नगर निगम भी प्रयागराज

प्रदेश कैबिनेट इलाहाबाद जिला व मंडल के बाद इलाहाबाद नगर निगम का नाम भी बदलकर प्रयाराज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
नगर विकास विभाग ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि इलाहाबाद नगर वैदिक व पौराणिक काल से प्रयाग के  नाम से ही जाना जाता रहा है। इलाहाबाद  नामकरण मध्यकाल में अकबर के आगमन के बाद मुगल शासनकाल में हुआ है। इलाहाबाद की जनता लंबे समय से इलाहाबाद के स्थान पर नगर का नाम प्रयाग या प्रयागराज करने की मांग करती आ ही है। विभाग ने प्रयाग व प्रयागराज में से प्रयागराज नाम किए जाने के लिए पौराणिक संदर्भों का हवाला दिया है। कैबिनेट ने नगर निगम इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है।

जल संभरण संशोधन विधेयक का मसौदा मंजूर

जल निगम के चेयरमैन के पद को लाभ के दायरे में लाने के लिए नगर विकास विभाग के ‘उप्र जल संभरण एवं सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक-2018 के मसौदे को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इससे संशोधन विधेयक को विधानसभा केइसी सत्र में पटल पर रखने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, अक्तूबर में कैबिनेट ने ‘उप्र जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम-1975’ की धारा-7 की उपधारा (3) को अधिनियम से निकालने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके लिए सरकार ने यह  विधेयक तैयार कराया है। विधेयक के सदन से पारित होने के बाद जल निगम के चेयरमैन का पद लाभ का पद माना जाएगा और चेयरमैन को निगम के प्रबंधकीय व्यवस्था को नियंत्रित करने का भी अधिकार मिल जाएगा। बता दें कि  सपा सरकार में मो. आजम खां नगर विकास विभाग के मंत्री के साथ ही चेयरमैन भी थे। नियमानुसार वे खुद इस पद पर नहीं रह सकते थे, इसलिए आजम ने 2007 में कैबिनेट के जरिए चेयरमैन के पद को गैर लाभ का पद घोषित कराया था और प्रबंधकीय व्यवस्था पर नियंत्रण को भी खत्म कर दिया था।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों व सोशल सेक्टर की सीएजी रिपोर्ट पेश करने को मंजूरी

कैबिनेट ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों व जनरल व सोशल सेक्टर से जुड़ी सीएजी की रिपोर्ट विधानमंडल में पेश करने से जुड़े प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। बता दें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वर्ष के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और जनरल व सोशल सेक्टर से जुड़ी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। सरकार इसे विधानमंडल के चालू सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। कैबिनेट ने इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

सरकारी योजना में मकान गंवाने वाले भी पाएंगे आसरा योजना में आवास

शहरी गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए अल्पसंख्यक बहुल व मलिन बस्तियों के लिए शुरू की गई ‘आसरा योजना’ के तहत अब ऐसे आवासहीन लोग भी मकान पा सकेंगे, जिनके मकान या जमीन सरकारी योजनाओं के चलते खत्म हो गई है। ऐसे लोगों को भी अब आसरा योजना का लाभार्थी मानते हुए मकान मुहैया कराया जाएगा। नगर विकास विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। विभाग ने योजना में लाभार्थी चयन और आवास आवंटन की प्रक्रिया में संशोधन का प्रस्ताव किया था। 2012-13 में शुरू हुई इस योजना में आवास आवंटन और लाभार्थी चयन के मानक तय हैं। इसके मुताबिक अल्पसंख्यक या मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग ही मकान पा सकते थे। लेकिन सरकार ने अब इन दोनों मानकों में संशोधन कर दिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed