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Lucknow News: रील, मीम और वर्ग पहेली से हो रही नए जमाने की पढ़ाई

Sun, 06 Oct 2024 07:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2024 07:42 PM IST
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New age education is being done through reels, memes and crossword puzzles
लखनऊ। रील, मीम और सोशल मीडिया का आनंद उठाती युवा पीढ़ी को उसी के अंदाज में पढ़ाने की कोशिश हो रही है। नई शिक्षा नीति भी रटने के बजाय आकर्षक तरीके से पढ़ाई करने पर जोर देती है। लखनऊ विश्वविद्यालय के कई शिक्षक बेहद आकर्षक और अनूठे अंदाज में विद्यार्थियों से मिड टर्म के असाइनमेंट करवा रहे हैं। विज्ञान के विद्यार्थी भी रील, मीम और वर्ग पहेली के जरिए अपनी बात कह रहे हैं।
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लखनऊ विवि में स्नातक स्तर पर 100 नंबर के हर प्रश्नपत्र में 75 नंबर लिखित परीक्षा और 25 नंबर असाइनमेंट के आधार पर दिए जाते हैं। इसे मिड टर्म परीक्षा कहते हैं। परास्नातक स्तर पर यह बंटवारा 70 और 30 नंबर का है। मिड टर्म में पांच अंक उपस्थिति के लिए तय हैं। नई शिक्षा नीति में मिड टर्म का मूल्यांकन तय करने का अधिकार शिक्षक को दिया गया है।
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शिक्षक मिड टर्म के लिए विद्यार्थियों को कोई असाइनमेंट दे सकते हैं। यह असाइनमेंट लिखित मौखिक या किसी अन्य रूप में भी हो सकता है। बहुविकल्पीय सवाल, क्लास प्रजेंटेशन, प्रश्नोत्तरी या ग्रुप डिस्कशन भी मूल्यांकन का आधार हो सकता है। लविवि के जूलॉजी विभाग में एमएससी के विद्यार्थियों को जीव-जंतुओं के जीवन पर आधारित मिड टर्म असाइनमेंट दिए गए हैं। डीन एकेडमिक्स और विभाग की शिक्षिका प्रो. गीतांजलि मिश्रा ने पक्षियों के जीवन पर आधारित असाइनमेंट परंपरागत तरीके के बजाय विद्यार्थियों से उनके अंदाज में करने को कहा है। एमएससी के विद्यार्थियों ने भी अपनी रचनात्मक दिखाते हुए रील और मीम के माध्यम से असाइनमेंट पूरा कर दिया।
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प्रो. गीतांजलि मिश्रा के मुताबिक, उनको हैरानी हुई कि विद्यार्थियों ने बेहद आकर्षक अंदाज में पक्षियों के घोसले बनाने में भी प्लास्टिक का उपयोग होने की बात कही। वर्ग पहेली के माध्यम से होने वाले असाइनमेंट भी खूब पसंद किए गए। प्रो. गीतांजलि मिश्रा के साथ ही उनकी साथी शिक्षक डॉक्टर शैली मलिक ने भी छात्रों को वीडियो के माध्यम से अपना असाइनमेंट पूरा करने का विकल्प दिया।
क्लास की स्टूडेंट अंजली के मुताबिक, बोरिंग तरीके के बजाय अपने अंदाज में असाइनमेंट करने में बड़ा मजा आया। क्लास के ज्यादातर विधार्थी भी इससे इत्तेफाक रखते दिखे। विज्ञान के विषयों के साथ ही कला संकाय के भी कुछ विभागों में नई पहल की जा रही है। पत्रकारिता विभाग के प्रो. मुकुल श्रीवास्तव और भाषा विज्ञान विभाग की डाॅ. माद्री भी कुछ इसी अंदाज में विद्यार्थियों से असाइनमेंट करने को कहते हैं।

इसलिए जरूरी है नया तरीका

प्रो. गीतांजलि मिश्रा बताती हैं कि शिक्षकों को पढ़ाई के नए तरीके अपनाने होंगे। तभी परंपरागत पाठ्यक्रमों से विद्यार्थियों को जोड़कर रखा जा सकता है। रील और मीम देखने में जितने आकर्षक और मनोरंजक दिखते हैं, असल में उनको बनाना उतना ही मुश्किल होता है। बात जब पढ़ाई और सिलेबस की हो तो मुश्किल और भी बढ़ जाती है। सबसे बड़ी बात यह होती है कि इन माध्यमाें से अपनी बात कहने के लिए आपको विषय अच्छी तरह से आना चाहिए। नई शिक्षा नीति भी रटने के बजाय पढ़ाई को विद्यार्थी की इच्छा और मर्जी के हिसाब से सरल बनाने की बात करती है।


चिट्ठी कह देती है मन की बात

लविवि में पत्रकारिता विभाग के शिक्षक प्रो. मुकुल श्रीवास्तव नई शिक्षा नीति लागू होने के पहले से अलग अंदाज में असाइनमेंट कराने के लिए विवि में जाने जाते हैं। ब्लॉग और वीडियो के साथ ही विद्यार्थियों से चिट्ठी लिखवाने का उनका तरीका भी चर्चा में रहता है। प्रो. श्रीवास्तव के मुताबिक, वे अपने विद्यार्थियों से क्लास में चिट्ठी लिखने को कहते हैं। कई बार छात्र अपनी बात शब्दों से बयां नहीं कर पाते। ऐसे में चिट्ठी मन की बात कहने का जरिया बनती है।
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