कांग्रेसी हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी, मायावती पर लगाए थे पैसे मांगने व ब्लैकमेलिंग के आरोप
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एक समय बसपा के ताकतवर नेता और प्रमुख मुस्लिम चेहरा रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने बसपा से निकाले जाने पर मायावती पर पैसे मांगने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था और मायावती के साथ बातचीत के ऑडियो टेप जारी किए थे।
नसीमुद्दीन को करीब 10 महीने पहले बसपा से निकाला गया था। इसके पहले वो उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बुंदेखंड और पश्चिमी यूपी के प्रभारी रह चुके थे। बसपा से उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निकाला गया था।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से दो-तीन मुलाकातों के बाद कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राहुल की नसीमुद्दीन से पहली मुलाकात 28 दिसंबर को गुजरात चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई। जनवरी मध्य में एक और मुलाकात में बात आगे बढ़ी। इस बीच राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने जमीनी स्तर की पूरी तैयारी कर ली। गत रविवार को राहुल के साथ सिद्दीकी की मुलाकात में आगे की राजनीति और रणनीति के साथ उनके समर्थकों के शामिल होने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
नसीमुद्दीन ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने और विधानसभा चुनाव में केवल 19 सीटें जीत पाने का ठीकरा मायावती ने उनके सिर फोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वे मायावती की ब्लैकमेलिंग और लगातार पैसों की मांग से आजिज़ आ गए थे। एक सप्ताह बाद ही नसीमुद्दीन ने अपने कुछ समर्थकों के साथ एक नई पार्टी राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा बना ली थी। लेकिन तभी से उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में कयास लग रहे थे।
सपा में भी शामिल होने का मिला था ऑफर
नसीमुद्दीन की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई मुलाकातें हुई। इसके बाद उनके सपा में शामिल होने की संभावना बढ़ गई थी। पिछले वर्ष सितंबर में उन्होंने स्वीकार भी किया कि उन्हें सपा की ओर से पार्टी में शामिल होने का ऑफर मिला है। लेकिन दो वजहों से वे सपा में शामिल नहीं हो पाए। अखिलेश उनके सभी समर्थकों को पार्टी में समायोजित कर पाने में मुश्किल महसूस कर रहे थे। साथ ही, उन्हें सपा में दाखिल किए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा।
इसी के बाद सिद्दीकी ने कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ाईं। उनकी राहुल गांधी से दो मुलाकातें हुई। राहुल ने उनके प्रमुख समर्थकों को कांग्रेस में समायोजित करने और यथासंभव लोगों को टिकट देने का भी वादा किया। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सिद्दीकी के शामिल होने से कांग्रेस और सपा के रिश्तों में कोई फर्क नहीं आएगा। दोनों आगामी चुनावों में उत्तर प्रदेश में तालमेल करना चाहते हैं।