मुजफ्फरनगर दंगों की जांच पूरी, खुलेगा 62 मौतों का राज
अगस्त 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति विष्णु सहाय आयोग ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय ने राजभवन जाकर राज्यपाल राम नाईक को छह खंडों में 775 पेज की यह रिपोर्ट सौंपी।
इसके अंतिम 25 पेज में जांच के निष्कर्ष दिए गए हैं। राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही वे कुछ कह सकते हैं। वे बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह रिपोर्ट भेजेंगे।
जस्टिस सहाय ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को रिपोर्ट सौंप दी है। इसके बारे में उनका कुछ कहना उचित नहीं होगा। उधर, अधिकारी भी इस रिपोर्ट को लेकर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसके बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया जबकि प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने कहा कि उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं देखी है। वैसे भी रिपोर्ट पहले सदन के पटल पर रखी जाएगी। उसके बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
50 हजार से अधिक लोगों को करना पड़ा था पलायन
राज्य सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए 9 सितंबर 2013 को हाईकोर्ट से अवकाश प्राप्त जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।
आयोग को दो माह में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन इस अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर कई बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था।
दंगे में 62 से अधिक की हुई थी मौत
27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में शुरू हुई हिंसा बाद में आसपास के कई जिलों में फैल गई थी। इस दंगे में 62 से अधिक की मौत हुई थी और इससे कहीं अधिक लोग घायल हुए थे।
बड़े पैमाने पर हुई आगजनी व हिंसा की वजह से 50 हजार से अधिक लोग अपने घरों से पलायन कर गए थे और महीनों राहत शिविरों में रहे।