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बुखारी की बड़ी भूल, मुस्लिमों के लिए बने 'बिकाऊ'
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 05 Apr 2014 11:00 AM IST
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दिल्ली की जामा मस्जिद से शाही इमाम अहमद बुखारी के कांग्रेस को वोट करने की अपील पर मुस्लिम समुदाय ने कड़ी निंदा की है, मामिन अंसार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अकरम अंसारी ने तो उन्हें बिकाऊ उलेमा तक कह दिया है।
अकरम के अनुसार मुसलमान अब जागरूक है। वह पार्टी व उसके उम्मीदवारों को अच्छे से समझता है। अहमद बुखारी जैसे शाही इमाम की अपील से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होना, बल्कि नुकसान हो सकता है।
मुसलमान अब उसको वोट करेगा जो सुरक्षा, न्याय व रोजगार की बात करेगा।
मुसलमान इन 65 सालों में सियासी पार्टियों की ही नहीं, उलमा की नीयत को भी समझ चुका है। उसकी नजर में ऐसे बिकाऊ उलमा की कोई इज्जत नहीं है।
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अकरम के अनुसार मुसलमान अब जागरूक है। वह पार्टी व उसके उम्मीदवारों को अच्छे से समझता है। अहमद बुखारी जैसे शाही इमाम की अपील से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होना, बल्कि नुकसान हो सकता है।
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मुसलमान अब उसको वोट करेगा जो सुरक्षा, न्याय व रोजगार की बात करेगा।
मुसलमान इन 65 सालों में सियासी पार्टियों की ही नहीं, उलमा की नीयत को भी समझ चुका है। उसकी नजर में ऐसे बिकाऊ उलमा की कोई इज्जत नहीं है।
वोट की ठेकेदारी न करें
इस्लामिक सेंटर आफ इंडिया अध्यक्ष ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि इस तरह की अपीलों से लोकतंत्र की प्रक्रिया पर गलत असर पड़ता है।
हर वोटर आजाद है कि वह अपनी समझ से जिसे चाहे, उसे वोट दे। अहमद बुखारी पिछले चुनावों में जितनी सियासी पार्टियां हैं, सबके हक में अपील जारी कर चुके हैं।
यहां तक कि बीजेपी का भी समर्थन कर चुके हैं। मुसलमान वोटर अब जागरूक हैं, उन पर अहमद बुखारी की अपील का कोई असर नहीं पड़ने वाला।
हर वोटर आजाद है कि वह अपनी समझ से जिसे चाहे, उसे वोट दे। अहमद बुखारी पिछले चुनावों में जितनी सियासी पार्टियां हैं, सबके हक में अपील जारी कर चुके हैं।
यहां तक कि बीजेपी का भी समर्थन कर चुके हैं। मुसलमान वोटर अब जागरूक हैं, उन पर अहमद बुखारी की अपील का कोई असर नहीं पड़ने वाला।
राजनीतिक पार्टियों के लिए सेल्समैन हैं बुखारी
शिया धर्मगुरू कल्बे जव्वाद का कहना है कि अहमद बुखारी कभी शाही मस्जिद पर खड़े होकर तो कभी सपा कार्यालय पर खड़े होकर वोटर बेच रहे हैं।
वे उलमा नहीं, यह अच्छे सेल्समैन हैं। इनकी अपील मुसलमानों में बेअसर है। कांग्रेस की पैरवी करने वाले बुखारी इसके पहले सपा और भाजपा तक को वोट देने की अपील कर चुके हैं।
ऐसे शाही इमाम की अपील का असर मुसलमानों पर नहीं पड़ने वाला है।
वे उलमा नहीं, यह अच्छे सेल्समैन हैं। इनकी अपील मुसलमानों में बेअसर है। कांग्रेस की पैरवी करने वाले बुखारी इसके पहले सपा और भाजपा तक को वोट देने की अपील कर चुके हैं।
ऐसे शाही इमाम की अपील का असर मुसलमानों पर नहीं पड़ने वाला है।
मुसलमान किसी के दबाव में वोट नहीं करता
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी का कहना है कि अहमद बुखारी मुसलमानों के ठेकेदार नहीं हैं, मतदान के लिए किसी तरह के दबाव व जोर-जबर्दस्ती का सवाल ही नहीं उठता।
इस तरह के उलमा वोटरों को गुमराह करने में कामयाब जरूर होते हैं लेकिन इसका वोटर पर ज्यादा असर नहीं होता।
चुनाव के दौरान दिल्ली के शाही इमाम का बयान बचकाना है। वोट बैंक की राजनीति में उलमा व इमाम का सामने आने का मकसद वोटर जानता है।
इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है कि शाही मस्जिद के इमाम के किसी बयान की इतनी निंदा हुई हो।
इस तरह के उलमा वोटरों को गुमराह करने में कामयाब जरूर होते हैं लेकिन इसका वोटर पर ज्यादा असर नहीं होता।
चुनाव के दौरान दिल्ली के शाही इमाम का बयान बचकाना है। वोट बैंक की राजनीति में उलमा व इमाम का सामने आने का मकसद वोटर जानता है।
इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है कि शाही मस्जिद के इमाम के किसी बयान की इतनी निंदा हुई हो।