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मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने कहा: ज्ञानवापी मस्जिद का एएसआई सर्वे का फैसला हैरानी भरा, नए विवाद को देगा जन्म
Sat, 05 Aug 2023 08:40 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 05 Aug 2023 08:40 PM IST
सार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बयान जारी कर कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला धर्मनिरपेक्षता के कानून और सिद्धांत के खिलाफ था।
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ज्ञानवापी मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति पर आश्चर्य जताते हुये उसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बोर्ड का कहना है कि ये तब हुआ है जब बाबरी मस्जिद फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की महत्वाकांक्षा की व्याख्या कर चुका है। बोर्ड ने आशंका जताते हुये कहा कि इस सर्वे से एक नये विवाद का रास्ता तैयार होगा, जो प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लागू करके रोका जा सकता है।
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बयान जारी कर कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला धर्मनिरपेक्षता के कानून और सिद्धांत के खिलाफ था। उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्पक्षेप करेगा, क्योंकि यह धार्मिक स्थल के मौजूदा धार्मिक चरित्र के विपरीत राय देने से संबिन्धत है, विशेष रूप से जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही बाबरी मस्जिद फैसले में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की महत्वाकाक्षा की व्याख्या कर चुका है।
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उन्होंने कहा कि जब संसद द्वारा प्लेसेस ऑफ वर्शिप पर कानून लागू किया गया तो देश को आश्वासन दिया गया कि बाबरी मस्जिद विवाद के बाद हर नए विवाद का रास्ता रोकने के लिये यह कानून है। किसी भी पूजा स्थल रुपांतरण पर प्रतिबंध लगाने और किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र के रखरखाव के लिये इस कानून में स्पष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के उददेश्यों के विपरीत सर्वे व अन्य फैसले हुये हैं जो नए संघर्ष पैदा करने का कारण बन सकते हैं।
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बाबरी मस्जिद के सर्वे में भी खंभे मिलने की हुई थी बात
डा. काासिम रसूल ने कहा कि पूर्व में बाबरी मस्जिद स्थल पर एएसआई के सर्वे में मंदिर के खम्बों के निशान मिल गये थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में यह स्पष्ट कर दिया कि बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को तोड़ कर नही बनाया गया। फैसले में कहा गया कि ऐसा कोई सुबूत नही मिला है। उन्होंने कहा कि पिछले सर्वे में ज्ञानवापी मस्जिद के फव्वारा पर शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था और मुसलमानों को वुजु करने से रोका गया था।
उन्होंने कहा निचली अदालत ने बार-बार कहा कि मकसद मस्जिद को नुकसाने पहुंचाने का नही बल्कि मस्जिद के नीचे क्या यह जानना है। उन्होंने कहा कि सवाल उठता है कि वह किस उद्देश्य से काम करेगा। उन्होंने कहा कि नये विवादों को 1991 के एकट को लागू करके रोका जा सकता है, जिसकी व्याख्या बाबरी मस्जिद के फैसले में पहले से ही उपलब्ध है।