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अब मोदी के समर्थन में पूर्व मंत्री आरिफ मोहम्मद खान
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sat, 26 Oct 2013 12:29 PM IST
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शिया धर्मगुरु व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के अतीत को माफ करने की बात कहकर बर्र के छत्ते पर ढेला फेंकने जैसा काम किया है।
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ज्यादातर लोग भन्नाए हुए हैं। कोई भी मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सादिक की राय को कान देने को तैयार नहीं है।
ज्यादातर का कहना है कि मुस्लिम अवाम नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों में बेगुनाह मुसलमानों के कत्ल का गुनाहगार मानता है और उन्हें माफ करने की बात को कुफ्र समझता है।
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जमीयत उलमा हिंद के एक खेमे के महासचिव मौलाना महमूद मदनी सरीखे कइयों ने तो सादिक के बयान पर बात करने से ही इन्कार कर दिया। दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम बनारसी ने भी इस मसले पर पल्ला झाड़ दिया।
मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली कहते हैं कि मौलाना सादिक मोदी का अतीत भूलने को तैयार हैं, पर क्या मोदी अपने गुनाहों के लिए माफी मांगने को तैयार हैं?
वह कहते हैं कि गुजरात दंगों के अलावा क्या मोदी बाबरी मस्जिद विध्वंस, समान नागरिक संहिता, धारा 370 और पर्सनल ला पर अपने विचार बदलने को तैयार हैं।
मौलाना सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सादिक यह भी बताएंगे कि क्या नरेंद्र मोदी की सोच इस देश के लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष ढांचे को तोड़ने वाली नहीं है।
मोदी को लेकर तनातनी के माहौल में शाहबानो केस से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने वाले एकमात्र पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने खुलकर मौलाना का समर्थन किया और कहा कि एक गतिशील समाज में एक जगह रुककर देखने का समय नहीं होता।
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