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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Mulayam Singh Yadav says about English.

'अंग्रेजी में वोट मांगें तो जमानतें जब्त हो जाएं'

Mon, 08 Dec 2014 01:09 AM IST
आशुतोष/अमर उजाला, लखनऊ
आशुतोष/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 08 Dec 2014 01:09 AM IST
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Mulayam Singh Yadav says about English.

‘मैंने अक्सर अंग्रेजी हटाने की बात कही है, अंग्रेजी मिटाने की बात नहीं कही है..। अंग्रेजी का विरोध किया है, लेकिन उसके प्रयोग को लेकर, सीखने का नहीं।

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लोकसभा चुनावों के दौरान गलत नहीं कहा कि हिंदी में लोग वोट मांगते हैं और संसद में अंग्रेजी में भाषण देते हैं। अंग्रेजी में जाकर वोट मांगकर देखें तो उनकी जमानतें जब्त हो जाएं।’
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मुख्य अतिथि मुलायम सिंह यादव ने इन शब्दों में हिंदी की पैरवी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम अगर मातृभाषा को बढ़ावा दें तो हिंदी अपने आप बढ़ जाएगी।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए मुलायम बोले, मैं जब रक्षामंत्री बना तो कहा कि विभाग में हिंदी में ही कामकाज होगा। इसके बाद कलाम साहब तक ने हिंदी सीख ली। बाद में वे जब सैफई एक कार्यक्रम में आए तो हिंदी में भाषण भी दिया।
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शादी-ब्याह भी कोई खबर है क्या?

Mulayam Singh Yadav says about English.

समारोह में सपा सुप्रीमो का पीएम बनने का ख्वाब टूटने का दर्द छलक ही आया। उन्होंने किसी खास पद का नाम लिए बिना कहा कि पद पाने की अब कोई चाह नहीं रह गई।

एक पद मिल रहा था, लेकिन अब संतुष्टि हो गई है। मुलायम ने दार्शनिक अंदाज में कहा कि कोई भी मंत्री या प्रधानमंत्री पद पर अमर नहीं रहता है। काम कर जाएंगे, तो अमर हो जाएंगे।

इससे पहले समारोह से जल्दी जाने के लिए घर में होने वाले मांगलिक आयोजन का हवाला देते हुए मुलायम ने मीडिया पर कटाक्ष भी किया। कहा, ‘शादी-ब्याह भी कोई खबर है क्या? फिर भी अखबारों में खूब छपता है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी दिखता है। लोकसभा जाता हूं तो वहां भी पत्रकार सवाल पूछते हैं, लालूजी से संबंध होने जा रहा है...। भला बताओ पहले कब उनसे संबंध नहीं रहे। हमारी उनकी दोस्ती बीसों साल से है।

नेताजी ने छलांग लगाकर फाड़ दिया था अंग्रेजी का बैनर

Mulayam Singh Yadav says about English.

हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि दो दशक पहले तमिलनाडु के दौरे पर गए नेताजी ने पत्रकारों के सवाल पर कहा था कि वे यहां अंग्रेजी नहीं, तमिल थोपने आए हैं, ताकि अंग्रेजी रोकी जाए।

जब यह बयान अखबारों में छपा तो अगले दिन वहां के तत्कालीन सीएम करुणानिधि ने खुद मुलायम को फोन करके मुलाकात के लिए बुला लिया था। एक जगह नेताजी के स्वागत के लिए बैनर में अंग्रेजी में था। नेताजी को यह नागवार गुजरा और उन्होंने छलांग लगाकर उसे फाड़ दिया।

पुरस्कार के लिए एक दिन में 100-100 सिफारिशी फोन

उदय प्रताप सिंह ने बताया कि पुरस्कारों का चयन इस बार उनके लिए काफी दुरूह रहा। एक दिन में मेरे और सुधाकर (निदेशक हिंदी संस्थान) के पास 100-100 सिफारिशी फोन आए।

मैंने तो फोन उठाना ही बंद कर दिया। सम्मान भीख की तरह मांगने की चीज नहीं है। यही नहीं, लोगों ने दूसरे की लिखी किताबें अपने नाम से छपवा दीं। सिर्फ एक पैरा खुद का, बाकी दूसरे से शब्द-प्रति शब्द मेल खाता हुआ।

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