मुलायम बोले, 1962 के भ्रम में न रहे चीन, सीमा की रक्षा के लिए हम सब एक
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सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा कि भारत को खतरा पाकिस्तान से नहीं, बल्कि चीन से है। वह 20 साल से यह बात कहते आ रहे हैं। चीन को 1962 के भ्रम में नहीं रहना चाहिए। देश और अपनी सीमा की रक्षा के लिए हम सब एक हैं। भारतीय सेना हर मोर्चे पर पाक व चीन का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। वह शनिवार को बख्शी का तालाब के कठवारा गांव स्थित मां चन्द्रिका देवी मंदिर परिसर में वरिष्ठ समाजवादी नेता भगवती सिंह के 85वें जन्म दिन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, पाकिस्तान को आगे करके चीन हमें लगातार चुनौती दे रहा है। सरकार चीन व पाकिस्तान को लगातार जवाब दे रही है। हमारे लिए देश की सुरक्षा व अखंडता सर्वोपरि है।
मुलायम ने कहा, मेरे रक्षा मंत्री रहते चीन ने हमारी सीमा के एक किमी अंदर घुसकर झंडा गाड़ दिया था। हमने अगले ही दिन उसकी सीमा में चार किमी अंदर जाकर अपना झंडा गाड़ दिया। जब तक मैं रक्षा मंत्री रहा, पाकिस्तान व चीन ने कभी देश की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं की। कहा, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने वरिष्ठ नेताओं से सलाह ली थी। हमने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हम सब एक हैं, मुश्किल समय में भी साथ देंगे।
.... तो भूतपूर्व प्रधानमंत्री होते
मुलायम ने कहा, समाजवादी कभी नीतियों से समझौता नहीं करते। एक बार जो ठान लेते हैं उससे पीछे नहीं हटते। रविवार को पटना में लालू यादव की रैली से पहले उनकी प्रधानमंत्री न बन पाने की टीस भी उभरी। कहा कि ज्योति बसु ने मुझे प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था। तब लालू ने इसका विरोध कर दिया। यदि पीएम बन जाते तो क्या फर्क पड़ता, अब तक भूतपूर्व प्रधानमंत्री हो गए होते। मुलायम ने कहा, युवा कार्यकर्ताओं को भगवती सिंह से राजनीति व समाजसेवा सीखनी चाहिए। उन्होंने कभी अपने लिए कोई पद नहीं मांगा। मैंने खुद उन्हें विधान परिषद व राज्यसभा में भेजा।
आपातकाल में 19 महीने जेल में रहे। कई बार विधायक, सांसद व मंत्री बनने के बावजूद उनके पास रहने को घर नहीं है। वहीं शिवपाल ने कहा कि भगवती सिंह हमारे मार्गदर्शक हैं। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया। बताया कि बसपा सरकार में आंदोलन होना था। नेताजी के घर के बाहर बैरिकेडिंग थी। नेता विपक्ष की हैसियत से मैं परिवर्तन चौक पहुंचा तो बमुश्किल 10-12 लोग थे। तभी भगवती सिंह का फोन आया कि उनके यहां 200-300 लोग हैं। मैं पहुंचा तो भगवती सिंह एक नौजवान की तरह डीआईजी से भिड़ रहे थे। लगभग 80 वर्ष की उम्र में उनका जोश देखने लायक था।