{"_id":"687c4008bd45063a7248ecc4a196181f","slug":"muharram-in-lucknow-city-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...या हुसैन की सदाओं से गूंजा शहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...या हुसैन की सदाओं से गूंजा शहर
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 04 Nov 2014 11:58 AM IST
विज्ञापन
लखनऊ के विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से अलम शब-ए-आशूर की जियारत को आए अजादारों से सोमवार को सड़क भरी थी।
यहां बैठे अजादार सिसक रहे थे। जुलूस से पहले इमामबाड़ा नाजिम साहब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने मजलिस को खिताब करते हुए करबला में उस रात का वाकया बयां किया जब इमाम हुसैन और उनके खेमे ने शहादत दी थी।
इस दौरान वहां मौजूद अजादार ...जोर-जोर से रोने लगे। शब-ए-आशूर का अलम अजादारों के बीच निकाला गया। जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से अकबरी गेट, नक्खास व बिल्लौचपुरा होता हुआ गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज, मंसूर नगर तिराहा शिया यतीमखाना होता हुआ दरगाह हजरत अब्बास में सम्पन्न हो गया।
अजादारों ने पूरी रात मातम कर करबला के शहीदों को पुरसा दिया। जुलूस की सुरक्षा के बंदोबस्त को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
शाहनजफ इमामबाड़े में आग पर मातम कर अजादारों ने गम-ए-हुसैन में शिरकत की। इस मौके पर सुन्नी व शिया के अलावा हिंदू मातमदारों का हुजूम उमड़ा। करबला के शहीदों को पुरसा देते हुए सुन्नी समुदाय के अजादार आग पर मातम करते रहे और या हुसैन की सदाएं बुलंद करते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां बैठे अजादार सिसक रहे थे। जुलूस से पहले इमामबाड़ा नाजिम साहब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने मजलिस को खिताब करते हुए करबला में उस रात का वाकया बयां किया जब इमाम हुसैन और उनके खेमे ने शहादत दी थी।
इस दौरान वहां मौजूद अजादार ...जोर-जोर से रोने लगे। शब-ए-आशूर का अलम अजादारों के बीच निकाला गया। जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से अकबरी गेट, नक्खास व बिल्लौचपुरा होता हुआ गिरधारी सिंह इंटर कॉलेज, मंसूर नगर तिराहा शिया यतीमखाना होता हुआ दरगाह हजरत अब्बास में सम्पन्न हो गया।
विज्ञापन
अजादारों ने पूरी रात मातम कर करबला के शहीदों को पुरसा दिया। जुलूस की सुरक्षा के बंदोबस्त को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
शाहनजफ इमामबाड़े में आग पर मातम कर अजादारों ने गम-ए-हुसैन में शिरकत की। इस मौके पर सुन्नी व शिया के अलावा हिंदू मातमदारों का हुजूम उमड़ा। करबला के शहीदों को पुरसा देते हुए सुन्नी समुदाय के अजादार आग पर मातम करते रहे और या हुसैन की सदाएं बुलंद करते रहे।
विज्ञापन