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Lucknow News: पांच साल से एमआरआई भवन पर लटका ताला
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बंद एमआरआई भवन।
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लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में पांच साल पहले एमआरआई भवन तो बनकर तैयार हो गया, लेकिन अब तक मशीन नहीं लग पाई है। करोड़ों की लागत से तैयार 750 बेड वाले इस अस्पताल में एमआरआई जांच सुविधा शुरू न होने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें मनमाने दाम चुकाने पड़ते हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एमआरआई मशीन मेडिकल कॉर्पोरेशन के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी है। भवन बनने के पांच साल बाद भी मशीन की आपूर्ति नहीं हो सकी है। फिलहाल भवन में ताला लटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि मशीन की टेंडर प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।
बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब चार से पांच हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें भर्ती और ओपीडी मिलाकर प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों को एमआरआई जांच की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा न होने से मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां जांच शुल्क कई गुना अधिक लिया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, मरीजों की सुविधा के लिए वर्ष 2020 में लगभग 18 लाख रुपये की लागत से एमआरआई भवन तैयार कराया गया था। उस समय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी, मगर पांच साल बाद भी भवन उपयोग में नहीं आ सका।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु ने बताया कि एमआरआई मशीन की खरीद प्रक्रिया मेडिकल कॉर्पोरेशन के जरिये कराई जा रही है। टेंडर पूरा होने के बाद मशीन की आपूर्ति और स्थापना की जाएगी। तब तक यह भवन यूं ही ताला बंद पड़ा रहेगा।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एमआरआई मशीन मेडिकल कॉर्पोरेशन के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी है। भवन बनने के पांच साल बाद भी मशीन की आपूर्ति नहीं हो सकी है। फिलहाल भवन में ताला लटका हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि मशीन की टेंडर प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।
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बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब चार से पांच हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें भर्ती और ओपीडी मिलाकर प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों को एमआरआई जांच की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा न होने से मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां जांच शुल्क कई गुना अधिक लिया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, मरीजों की सुविधा के लिए वर्ष 2020 में लगभग 18 लाख रुपये की लागत से एमआरआई भवन तैयार कराया गया था। उस समय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी, मगर पांच साल बाद भी भवन उपयोग में नहीं आ सका।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु ने बताया कि एमआरआई मशीन की खरीद प्रक्रिया मेडिकल कॉर्पोरेशन के जरिये कराई जा रही है। टेंडर पूरा होने के बाद मशीन की आपूर्ति और स्थापना की जाएगी। तब तक यह भवन यूं ही ताला बंद पड़ा रहेगा।