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आंदोलन लहूलुहान : 22 घंटे चला सरकार व किसानों का इम्तिहान, जाम लगाया पर बरता संयम
Tue, 05 Oct 2021 02:25 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 05 Oct 2021 02:25 AM IST
सार
किसान और सरकार, यह दोनों के लिए परीक्षा ही थी और सुकून तब आया जब धरना समाप्ति की घोषणा हुई।
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राकेश टिकैत और एडीजी प्रशांत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धरनास्थल की ओर रवाना होते किसानों का बढ़ता हुजूम और साथ ही बढ़ती पुलिस टुकड़ियों की संख्या। अंदाजा लगाइए कि अगर टकराव हो जाता तो क्या हालात बनते? पहले ही चार किसानों की मौत से लहूलुहान हो चले इस आंदोलन में और न जाने क्या-क्या होता। इसे रोकने की परीक्षा 22 घंटे तक चली। किसान और सरकार, यह दोनों के लिए परीक्षा ही थी और सुकून तब आया जब धरना समाप्ति की घोषणा हुई।
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तिकुनियां में किसान आंदोलन में सोमवार को दोहरी परीक्षा थी। परीक्षा किसानों के उस धैर्य की थी जिसमें उन्होंने अपने भीतर ज्वालामुखी को फटने से रोक रखा था। साथ ही सरकार की भी जो इस बवाल को टालने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए थी। रविवार को लखीमपुर खीरी के तिकुनियां कस्बे में हुई घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। किसान आंदोलन में इस तरह की घटना से जहां पूरे प्रदेश के किसान उद्वेलित थे तो वहीं राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने भी तिकुनियां कूच करने का एलान कर दिया था। उधर, घटना का शिकार हुए किसानों के शवों को उनके परिजनों एवं किसानों ने तिकुनियां में धरना स्थल पर ही रखकर जाम लगा दिया। रात को ही भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत यहां पहुंच गए थे तो आंदोलन को और मजबूती मिल गई।
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तनाव भरे इस माहौल को सामान्य करने के लिए प्रदेश सरकार ने भी अपनी पूरी ताकत लगाई। एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार के अलावा अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईजी लक्ष्मी सिंह समेत तमाम आला अफसर मौके पर डेरा डाले थे। सीएम को पल-पल की रिपोर्ट दी जाती रही। राकेश टिकैत को भी धरना स्थल से लगभग चार सौ मीटर दूर एक कॉलेज में ले जाकर बात की गई। रात से दोपहर 12 बजे तक तमाम सरकारी अमला मामले को निपटाने की कवायद में जुटा रहा और एक बजे तब जाकर मामला शांत हुआ जब मुआवजे और अन्य मांगों पर सहमति होने के बाद धरना समाप्ति की घोषणा की गई।
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