फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   motivation ; gram pradhan reeta varma

ग्रामीणों को जागरूक कर रहीं ग्राम प्रधान रीता, आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को मिली प्रधान की कुर्सी

Tue, 11 May 2021 02:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 11 May 2021 02:10 AM IST
विज्ञापन
motivation ; gram pradhan reeta varma
अनुराग सिंह
विज्ञापन

लखनऊ। लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे पर गोसाईंगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत है कबीरपुर। पिछले दिनों हुए त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनावों में कबीरपुर ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित इस ग्राम पंचायत की जनता ने पुरुष प्रत्याशियों के मुकाबले एक पढ़ी-लिखी योग्य महिला को अपना प्रधान चुना है। 33 वर्षीय स्नातक रीता वर्मा ने आजादी के बाद से पहली महिला ग्राम प्रधान के रूप में गांव की कमान संभाली है। शपथ लेने के बाद ही रीता वर्मा ने गांव के विकास की कमान संभाल ली है। वे गांव की सुरक्षा के जिम्मे के साथ ही गांव में घूम-घूमकर लोगों को कोविड नियमों के पालन, बचाव और स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां दे रही हैं।
दरअसल वर्ष 1952 में पंचायत का गठन होने के बाद से कबीरपुर में महिला सीट नहीं हुई। इसके चलते महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला। 1799 वोटरों वाली कबीरपुर की सीट इस बार भी पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हुई थी। इस बार युवाओं ने पंचायत की कमान महिला के हाथों में सौंपने का इरादा बनाकर पुरुष प्रत्याशी के खिलाफ महिला प्रत्याशी के रूप में रीता को उतारा। गांव के युवा अमन पटेल उर्फ बंटी बताते हैं कि मतदाताओं ने उमेश वर्मा की पत्नी रीता वर्मा पर दांव लगाया। राजनीति में भाग्य आजमाने चुनावी दंगल में कूदीं रीता ने महिलाओं की टोली के साथ घर-घर जाकर समर्थन मांगा। गांव की महिलाओं ने महिला प्रधान बनाकर इतिहास रचने की ठानी और उनकी टोली में शामिल हो गईं। दो मई को परिणाम घोषित होने पर रीता वर्मा ने चुनाव जीतकर नया कीर्तिमान बनाया। आखिरकार गांव को पहली बार महिला प्रधान मिली। कोरोना संक्रमण के दौरान रीता गांव में लोगों को जागरूक कर रही हैं। उन्हें कोविड नियमों का पालन करने की सीख दे रही हैं और साथ ही उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हल भी बता रही हैं।
विज्ञापन

आजादी के बाद पहली बार इन गांवों में आई प्रधानी
2700 मतदाताओं वाली पंचायत रायभान खेड़ा के मजरा धरमावत खेड़ा से कोई प्रधान नहीं बना। हालांकि समय-समय पर दावेदारों ने ताल ठोंकी, लेकिन नाकाम रहे। वर्ष 2000 में गांव के लोगों ने धरमावतखेड़ा से सुंदर को चुनाव लड़ाया। कड़े मुकाबले में वह 24 मतों से चुनाव हारकर उप विजेता रहे। मोहनलालगंज नगर पंचायत का गठन होने से इन्द्रजीतखेड़ा को रायभान खेड़ा ग्राम पंचायत में शामिल कर दिया गया। इन्द्रजीत खेड़ा के पंचायत में जुड़ने से नए चुनावी समीकरण बने और धरमावत खेड़ा निवासी सुमन रावत विजयी हुईं। सुमन ने आजादी के बाद पहली बार गांव को प्रधानी दिलाई। वहीं करीब एक हजार वोटरों वाला गांव रायभान खेड़ा खुद प्रधान बनाने में असफल रहा। इसके अलावा भौंदरी के मजरा गनियार को भी करीब 63 साल बाद पहली बार नेतृत्व मिला। गनियार निवासी बृजपाल सिंह के बेटे देवेन्द्र सिंह उर्फ बबलू सिंह चुनाव जीतकर गांव में प्रधानी लाने में सफल रहे। यह पहला मौका है जब गनियार से प्रधान चुना गया। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed