{"_id":"655fb6676937db44460b4739","slug":"mother-i-want-to-win-six-golds-lucknow-news-c-13-lko1012-503671-2023-11-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: मां छह गोल्ड जीतने हैं मुझे...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: मां छह गोल्ड जीतने हैं मुझे...
विज्ञापन
लखनऊ। नामिश कहता था मां बस छह गोल्ड जीत लूं, तुम देखना मैं जीतूंगा…, वह शांत था, हर कहना मानता था, कोई जिद नहीं। इतना अच्छा था मेरा बच्चा। पढ़ने में किसी से कोई कंप्टीशन नहीं, कहता क्यों करूं मां। जो फर्स्ट आएगा वो भी दूसरे क्लास में जाएगा, जो सेकंड आएगा उसे भी नए क्लास में जाना है। फिर भी 80-85 प्रतिशत से वह पास होता था। ये सबकुछ कहती जा रही थीं एएसपी श्वेता। आस-पड़ोस, नाते रिश्तेदार, सहयोगी, अधिकारियों की मौजूदगी के बीच सबकुछ शांत, सिर्फ एक मां के दिल में बसी अपने बच्चे की स्मृतियां बोल रही थीं। शब्द तो थे, पर उन्हें आंसुओं ने बांध रखा था। फूलों से सजी नामिश की तस्वीर देख शायद ही कोई शख्स ऐसा हो, जिसकी आंखें न नम हों।
अजीब सी विडंबना है, सांत्वना देने पहुंचे लोग मौन हैं। कहते हैं कि किस शब्द में धैर्य बंधाएं और क्या कहें। वहीं, श्वेता और उनकी मां एक-दूसरे को देख, संभालने की कोशिश कर रहीं। मां की तबीयत को देख श्वेता सब्र रखने की कोशिश तो कर रहीं मगर सब्र का बांध अचानक से टूट पड़ता है, तब वो एक ही सवाल करती हैं कि हम किसके सहारे जिएंगे अब।
अभी दशहरे की तो बात है, जब मां-नानी ने उसे श्रीराम जी की तरह तैयार किया था। 26 जनवरी पर कभी मां की तरह पुलिस अधिकारी तो कभी संंविधान निर्माता बनकर देश के संविधान के बारे में बताते नामिश की एक-एक बात अब सिर्फ यादें बनकर अपनों के दिल में सजी रहेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अजीब सी विडंबना है, सांत्वना देने पहुंचे लोग मौन हैं। कहते हैं कि किस शब्द में धैर्य बंधाएं और क्या कहें। वहीं, श्वेता और उनकी मां एक-दूसरे को देख, संभालने की कोशिश कर रहीं। मां की तबीयत को देख श्वेता सब्र रखने की कोशिश तो कर रहीं मगर सब्र का बांध अचानक से टूट पड़ता है, तब वो एक ही सवाल करती हैं कि हम किसके सहारे जिएंगे अब।
विज्ञापन
अभी दशहरे की तो बात है, जब मां-नानी ने उसे श्रीराम जी की तरह तैयार किया था। 26 जनवरी पर कभी मां की तरह पुलिस अधिकारी तो कभी संंविधान निर्माता बनकर देश के संविधान के बारे में बताते नामिश की एक-एक बात अब सिर्फ यादें बनकर अपनों के दिल में सजी रहेंगी।
विज्ञापन