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Lucknow News: मां को नहीं पता... दुनिया से चला गया जिगर का टुकड़ा
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पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।
लखनऊ। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सोमवार को स्लीपर बस पलटने से पांच यात्रियों की मौत से पीड़ित परिवारों के आंसू नहीं थम रहे हैं। हादसे में तीन बच्चों की मौत से दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।
दुर्घटना में छह वर्ष के बेटे गोलू को गंवाने वाले लक्ष्मण मांझी ने बताया कि वह तीन महीने से अंबाला में पत्नी निभा व बच्चों के साथ रहकर मजदूरी कर रहे हैं। आठ महीने की गर्भवती पत्नी की डिलीवरी कराने के लिए घर जा रहे थे। निभा को नहीं पता है कि उसका जिगर का टुकड़ा अब दुनिया से चला गया है। लक्ष्मण ने बताया कि बड़ी मुश्किल से कुछ पैसे जुटाए थे, जो खर्च हो गए। गर्भवती पत्नी का इलाज चल रहा है, जिसकी हालत गंभीर है। मंगलवार को लक्ष्मण और उनकी बेटी राधा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
हादसे में बच्चों अंजलि और प्रियांशु की मौत से पिता महेश का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी पत्नी सुलेखा का दाहिना हाथ टूट गया है, जिनका इलाज चल रहा है। सुलेखा परिवार के साथ कुरुक्षेत्र में रहकर मजदूरी करती थीं। बिहार से पहुंचे उनके भाई निरंजन ने बताया कि बेटी संगीता की 28 फरवरी को शादी है।
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इसमें शामिल होने के लिए बहन सुलेखा बेटे प्रियांशु, बेटी अंजलि और पूनम के साथ मायके जा रही थी। निरंजन ने पैसे जुटाए और 25 हजार रुपये में गाड़ी बुक कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। सुलेखा ने भतीजी की शादी के लिए कपड़े खरीदे थे। वह बस में कपड़े और कुछ रुपये लेकर बच्चों के साथ सवार हुई थीं। कुरुक्षेत्र से पहुंचीं सुलेखा की बहन चमचम का आरोप है कि सुलेखा के नए कपड़े और रुपये नहीं मिले। माना जा रहा है कि पलटी बस को सीधा करने के दौरान सामान बाहर गिर गया था। पीड़ित परिवारों ने बच्चों का अंतिम संस्कार लखनऊ में ही कराने का निर्णय लिया। इसके बाद एनजीओ एक कोशिश ऐसी भी की संचालिका वर्षा वर्मा ने अंजलि, प्रियांशु और गोलू का गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार करवाया। वर्षा ने बताया कि अंतिम संस्कार का खर्च एनजीओ उठाएगा।
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दुर्घटना में छह वर्ष के बेटे गोलू को गंवाने वाले लक्ष्मण मांझी ने बताया कि वह तीन महीने से अंबाला में पत्नी निभा व बच्चों के साथ रहकर मजदूरी कर रहे हैं। आठ महीने की गर्भवती पत्नी की डिलीवरी कराने के लिए घर जा रहे थे। निभा को नहीं पता है कि उसका जिगर का टुकड़ा अब दुनिया से चला गया है। लक्ष्मण ने बताया कि बड़ी मुश्किल से कुछ पैसे जुटाए थे, जो खर्च हो गए। गर्भवती पत्नी का इलाज चल रहा है, जिसकी हालत गंभीर है। मंगलवार को लक्ष्मण और उनकी बेटी राधा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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हादसे में बच्चों अंजलि और प्रियांशु की मौत से पिता महेश का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी पत्नी सुलेखा का दाहिना हाथ टूट गया है, जिनका इलाज चल रहा है। सुलेखा परिवार के साथ कुरुक्षेत्र में रहकर मजदूरी करती थीं। बिहार से पहुंचे उनके भाई निरंजन ने बताया कि बेटी संगीता की 28 फरवरी को शादी है।
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इसमें शामिल होने के लिए बहन सुलेखा बेटे प्रियांशु, बेटी अंजलि और पूनम के साथ मायके जा रही थी। निरंजन ने पैसे जुटाए और 25 हजार रुपये में गाड़ी बुक कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। सुलेखा ने भतीजी की शादी के लिए कपड़े खरीदे थे। वह बस में कपड़े और कुछ रुपये लेकर बच्चों के साथ सवार हुई थीं। कुरुक्षेत्र से पहुंचीं सुलेखा की बहन चमचम का आरोप है कि सुलेखा के नए कपड़े और रुपये नहीं मिले। माना जा रहा है कि पलटी बस को सीधा करने के दौरान सामान बाहर गिर गया था। पीड़ित परिवारों ने बच्चों का अंतिम संस्कार लखनऊ में ही कराने का निर्णय लिया। इसके बाद एनजीओ एक कोशिश ऐसी भी की संचालिका वर्षा वर्मा ने अंजलि, प्रियांशु और गोलू का गुलाला घाट पर अंतिम संस्कार करवाया। वर्षा ने बताया कि अंतिम संस्कार का खर्च एनजीओ उठाएगा।

पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।

पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।

पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।

पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।

पोस्टमार्टम हाउस पर बस यात्रियों के परिजन।