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मोनाड यूनिवर्सिटी मामला: उत्तर भारत के बड़े फर्जी डिग्री रैकेट की जांच करेगा ईडी, मनी लांड्रिंग का होगा केस

Thu, 22 May 2025 10:09 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 22 May 2025 10:09 PM IST
सार

Monad University case:मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री रैकेट का एसटीएफ द्वारा खुलासा किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इसकी जांच करेगा। 

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Monad University case: ED will investigate North India's biggest fake degree racket, money laundering case wi
मोनाड यूनिवर्सिटी मामला - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री रैकेट का एसटीएफ द्वारा खुलासा किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी हरकत में आ गया है। छह राज्यों के चल रहे उत्तर भारत के इस सबसे बड़े फर्जी डिग्री रैकेट की जांच शुरू करने के लिए ईडी की इंटेलिजेंस विंग जानकारी जुटा रही है। हापुड में मोनाड यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत सभी 11 आरोपियों के खिलाफ जल्द प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाएगा।

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बता दें कि एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह रैकेट यूपी के साथ बिहार, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान की करीब 15 यूनिवर्सिटी में भी सक्रिय था, जिसका संचालन हरियाणा के पलवल का रहने वाला संदीप सेहरावत कर रहा था। इस रैकेट ने विदेश में नौकरी और पढ़ाई के लिए जाने वाले करीब 10 हजार लोगों को फर्जी डिग्री और मार्कशीट मुहैया कराई थी। एसटीएफ इन सभी लोगों का ब्याेरा भी जुटा रही है। वहीं दूसरी ओर एसटीएफ यूनिवर्सिटी के बाकी कर्मचारियों और छात्रों के बयान भी दर्ज करने की तैयारी में है। सभी आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि इस रैकेट के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके।
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खास सतर्कता बरती जाएगी
बता दें कि फर्जी डिग्री रैकेट में गिरफ्तार विजेंद्र सिंह हुड्डा बाइक बोट घोटाले का भी आरोपी है। बाइक बोट घोटाले की जांच ईडी के लखनऊ कार्यालय द्वारा की जा रही थी, जिसमें कुछ अधिकारियों की आरोपियों को बचाने के लिए सक्रिय दलालों के साथ संलिप्तता की शिकायत पर जांच दिल्ली मुख्यालय ट्रांसफर कर दी गई थी। ईडी ने नोएडा से एक दलाल को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद आरोपियों से पैसा लेकर उन्हें क्लीन चिट देने का पर्दाफाश हुआ था। इसी वजह से फर्जी डिग्री रैकेट की जांच में बेहद सावधानी और सतर्कता बरती जाएगी।
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