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अधूरी रह गई वर्दी पर सितारे की चाहत: दिल की बीमारी के बाद भी प्रमोशन के लिए दौड़े, सातवें चक्कर में मौत

Sun, 10 Oct 2021 03:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 10 Oct 2021 03:32 PM IST
सार

56 साल के मोहन राम को आठ महीने पहले हार्ट अटैक पड़ा था। वह प्रमोशन के लिए दौड़ में हिस्सा ले रहे थे उनकी ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। अगर वह 3.2 किमी. दौड़ लगाते तो बन जाते उपनिरीक्षक।

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Mohan Ram ran for promotion died in seventh round.
मोहन राम - फोटो : amar ujala

विस्तार

उम्र 56 साल। फरवरी में ही हार्ट अटैक पड़ा। एक सप्ताह अस्पताल में भर्ती रहे। इसके बावजूद वर्दी पर सितारे लगाने की चाहत में अग्निशमन विभाग के चालक मोहन राम शनिवार को महानगर पीएसी के ग्राउंड पर 3.2 किलोमीटर की दौड़ लगाने उतर पड़े। चार सौ मीटर के मैदान के आठ चक्कर लगाने थे। मगर सातवें चक्कर में मोहन राम जिंदगी ही हार गए। वह गश खाकर गिरे और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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अग्निशमन विभाग के चालकों के सेकंड अफसर (उपनिरीक्षक) पद पर प्रमोशन के लिए शनिवार सुबह महानगर पीएसी ग्राउंड में 3.2 किलोमीटर की दौड़ आयोजित हुई। हजरतगंज के फायर स्टेशन ऑफिसर रामकुमार रावत ने बताया कि दौड़ में विभिन्न जनपदों के कुल 19 चालक प्रतिभाग करने आए थे। चार सौ मीटर के ग्राउंड के आठ चक्कर लगाने थे।
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सातवें चक्कर में प्रयागराज के नैनी फायर स्टेशन के चालक मोहन राम गश खाकर गिर गए। मोहन को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर नैनी के एफएसओ लालजी गुप्ता समेत मोहन के परिवारीजन लखनऊ पहुंचे। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिजन मोहन का शव लेकर मूल निवास गाजीपुर के सैदपुर चले गए।
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फरवरी में पड़ा था हार्टअटैक
नैनी के एफएसओ लालजी गुप्ता के मुताबिक, मोहन राम हृदय रोग से पीड़ित थे। आशंका है कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हुई है। मोहन राम के बेटे संदीप ने बताया कि 20 फरवरी को पिता को हार्ट अटैक पड़ा था। वह सप्ताहभर अस्पताल में भर्ती रहे थे। परिवार में पत्नी अमरावती और तीन बेटे संदीप, मनोज व अजीत हैं।

भेदभाव पर उठते सवाल

सिविल पुलिस में बिना दौड़ के पदोन्नति दे दी जाती है। वर्ष 2017 में करीब 4,700 कांस्टेबल को पदोन्नति देकर हेड कांस्टेबल और फिर पिछले महीने ही दूसरी पदोन्नति देकर इन्हें उपनिरीक्षक बना दिया गया। दोनों पदोन्नति में दौड़ नहीं कराई गई।

पुलिस महकमे में पदोन्नति की व्यवस्था समान होने पर भी पीएसी, सशस्त्र पुलिस व फायर सर्विस में पदोन्नति के लिए दौड़ कराई जाती है। ऐसे में भेदभाव पर सवाल उठते हैं। पीएसी, सशस्त्र पुलिस व फायर सर्विस के जवान कहते हैं कि 40 पार वाले पुलिसकर्मियों को अधिकारी परेड में शामिल होने से छूट दे देते हैं तो फिर पदोन्नति के लिए आखिर उन्हें छूट क्यों नहीं दी जाती।

प्रमोशन की दौड़ में एक पैर के सिपाही को भी नहीं मिली थी कोई छूट

महानगर के पीएसी ग्राउंड पर ही इसी साल एक अगस्त को पीएसी के हेड कांस्टेबलों की प्लाटून कमांडर पद पर प्रोन्नति के लिए दौड़ कराई गई थी। इसमें एक पैर के हेड कांस्टेबल तक को दौड़ा दिया गया था। जिसका बरसों पहले बीमारी के चलते डॉक्टरों ने एक पैर काट दिया था। वह लकड़ी के कृत्रिम पैर के सहारे चलता है, मगर पदोन्नति के लिए दौड़ से उसे छूट नहीं दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस हेड कांस्टेबल ने दौड़ पूरी कर ली थी, मगर कमेटी की संस्तुति की रिपोर्ट के बाद ही पदोन्नति दी जाएगी।

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