मोदी सरकार से मोर्चा लेने को तैयार मुस्लिमों की संस्था
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लोकसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजरें नतीजों पर हैं। वहीं मुसलमानों की शीर्ष संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केंद्र में बनने वाली नई सरकार से मोर्चा लेने को तैयार है।
वक्फ एक्ट और एडॉप्शन मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट को लेकर सरकार से सीधे मोर्चा ले चुका पर्सनल लॉ बोर्ड अब नई सरकार के सामने ये मुद्दे रखने की रणनीति तय करेगा।
महाराष्ट्र के जलगांव में 31 मई व 1 जून को होने वाली पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक में दारुलकजा के मामले, इस्लाह ए मुआशरा निकाह, तलाक, बाबरी मस्जिद के मुकदमों सहित अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
शरई मामलों में दखलंदाजी से रोका जाए
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना रावे हसनी नदवी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर भी बहस होगी कि नई सरकार से किस तरह निपटा जाए ताकि शरई मामलों में दखलंदाजी को रोका जा सके।
बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य व बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी बताते हैं कि एडॉप्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पर्सनल लॉ बोर्ड सहमत नहीं है क्योंकि यह शरीयत के मुताबिक नहीं है।
वहीं वक्फ एक्ट में किए गए बदलाव से भी पर्सनल लॉ बोर्ड सहमत नहीं है क्योंकि केंद्र सरकार ने पर्सनल लॉ बोर्ड से मांगे संशोधन को वक्फ एक्ट में शामिल नहीं किया है।
जारी रहेगी लड़ाई
एक अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि पर्सनल लॉ बोर्ड सियासत से हमेशा दूर रहा है लेकिन शरीयत के मामलों में हमेशा सरकारों से मुसलमानों का हक मांगा है।
एग्जिट पोल की पोल 16 मई को खुल जानी है। सरकार किसी की भी बने, शरई मामलों में पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों की लड़ाई लड़ेगा।
ऐसे में अगर केंद्र में भाजपा की सरकार आती है तो नरेंद्र मोदी को बतौर प्रधानमंत्री कार्यकाल की शुरूआत में ही बोर्ड के साथ बातचीत करनी पड़ सकती है।