मोदी के वाराणसी में आने के बाद कैसे हुई बिल्डरों की बल्ले-बल्ले!
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जयापुर में मोदी की ‘ब्रांड वैल्यू’ का असर दिखने लगा है। महज दस महीने में ही गांव में जमीन की कीमत पांच गुना से ज्यादा बढ़ गई है। यहां आशियाना बनाने के लिए दिल्ली, मुंबई तक से खरीदार आ रहे हैं।
मुंहमांगी कीमत पर भी उन्हें जमीन नहीं मिल रही। गांव में यह बदलाव दस महीने में आया है। बीते साल सात नवंबर को पीएम मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत आराजीलाइन ब्लॉक के इस गांव को गोद लिया था।
उस दिन से लेकर आज की तारीख में गांव कायाकल्प होने के रास्ते पर है। गांव के ही बुजुर्ग लालचंद पटेल कहते हैं, ‘यह सब मोदी जी के नाम का असर है। साल भर पहले जिस जमीन की कीमत एक से सवा लाख रुपये बिस्वा थी, आज वह छह से सात लाख रुपये के बीच है।
सड़क किनारे तो जमीन मिलना नामुमकिन हो गया है। गांव के अंदर जो जमीन 60 से 70 हजार रुपये बिस्वा थी, आज वह ढाई लाख बिस्वा हो चुकी है।’
कहा कि यहां के किसान मुंहमांगी कीमत पर भी अपनी जमीन बेचने को तैयार नहीं। उन्हें लगता है कि आने वाले समय में जयापुर में और बदलाव आएगा और उनके जमीन की कीमत कई गुना बढ़ेगी।
आस-पास के गांवों का हाल जस का तस
बीते दस महीने में जयापुर की तस्वीर काफी बदल गई है। पर, आसपास के गांव नरसड़ा, जक्खिनी और चंदापुर के हालात जस के तस ही हैं। इन गावों के वासी जयापुर के विकास को अवाक होकर देख रहे हैं।
उन्हें सौतियाडाह भी है कि जमीनों के रेट बढ़ाकर जयापुर कैसा इतराने लगा है, काश जयापुर के बहाने हमारे गावों पर कोई ध्यान देता। दूसरे गांव वालों ने इस सबके बावजूद जयापुर के विकास और वहां की जमीनों के रेट बढ़ने का फायदा उठाना शुरू कर दिया है।
उन्हें लग रहा है कि जयापुर में तो अब जमीन मिलने से रही। ऐसे में खरीदार पड़ोस के गांव का रुख जरूर करेंगे। इस मौकों को भुनाने से क्यों पीछे रहा जाय। चंदापुर के रहने वाले अजय सिंह कहते हैं, क्या हुआ जो हमारा गांव जयापुर नहीं बन पाया मगर सड़क किनारे की जमीन की मुंहमांगी कीमत पर वसूली ही जा सकती है। इन गांवों में भी रेट दो-तीन गुने तो मांगे ही जाने लगे हैं।