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UP News : रेलवे ठेकेदार के सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल बीकेटी इलाके मे मिले, पुलिस को मिले कई और अहम सुराग
Thu, 30 Jun 2022 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 30 Jun 2022 06:24 AM IST
सार
पुलिस को बीकेटी इलाके से ठेकेदार के तीनों सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल मिले। पुलिस के मुताबिक तीनों ने मोबाइल एक गांव में फेंक दिया था। तीनों मोबाइल गांव के तीन लड़कों ने उठा कर प्रयोग करना शुरू कर दिया था। सुरक्षाकर्मी के मोबाइल को सर्विंलास पर लेने वाली टीम जब इन तीनों लड़कों तक पहुंची तो पता चला कि उन्हें यह मोबाइल एक पेड़ के नीचे मिले थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कैंट केनीलमथा इलाके में रहने वाले रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर की हत्याकांड में पुलिस के हाथ पांचवें दिन अहम सुराग लगा। पुलिस को बीकेटी इलाके से ठेकेदार के तीनों सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल मिले। पुलिस के मुताबिक तीनों ने मोबाइल एक गांव में फेंक दिया था। तीनों मोबाइल गांव के तीन लड़कों ने उठा कर प्रयोग करना शुरू कर दिया था।
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सुरक्षाकर्मी के मोबाइल को सर्विंलास पर लेने वाली टीम जब इन तीनों लड़कों तक पहुंची तो पता चला कि उन्हें यह मोबाइल एक पेड़ के नीचे मिले थे। वहीं बिहार गई पुलिस टीम को कई अहम सुराग हाथ लगे है। वहां पर पुलिस को वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर के दुश्मनों की लंबी सूची मिली। जिसे देखने के बाद पुलिस के होश उड़ गये। पुलिस अब इन दुश्मनों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
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कैंट के नीलमथा में शनिवार को रेलवे ठेकेदार और बिहार के हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र ठाकुर की घर के अंदर हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने उसकी पत्नी व बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया था। वहीं गेट पर तैनात तीन सुरक्षाकर्मी ने भी कोई विरोध नहीं किया। वहीं वारदात के बाद भाग निकले थे। इस वारदात के पर्दाफाश में जुटी टीम को कई जानकारियां मिली थी। एक टीम बिहार में डेरा डाले हुये है।
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इस टीम को ही पता चला कि वीरेंद्र ठाकुर की हत्या की साजिश दो महीने पहले ही रची गई थी। वहां के दो शूटरों से सम्पर्क कर लिया गया था। इस टीम ने ही लखनऊ के अफसरों को बताया कि वीरेन्द्र भले ही लखनऊ जाकर रहने लगा था लेकिन यहां उसका दबदबा अभी भी माना जाता है। उसके कई दुश्मन बिहार में अभी भी है। ठेके और पहली पत्नी प्रियंका के बिटटू जायसवाल के साथ चले जाने के बाद उसकी दो गिरोह से अनबन बढ़ गई थी।
बीकेटी के बच्चों ने नया सिम लगाकर किया प्रयोग
पुलिस के मुताबिक वीरेंद्र उर्फ गोरख ने अपनी सुरक्षा के लिए निजी गार्ड ले रखे थे। उसने सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जनवरी में की थी। शनिवार दोपहर को जब उस पर हमला किया गया तो तीन सुरक्षाकर्मी घर पर मौजूद थे। लेकिन किसी ने भी अपने असलहे का प्रयोग कर वीरेंद्र के हमलावरों पर फायरिंग नहीं की। वहीं वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों के वापस जाने केबाद सभी सुरक्षाकर्मी भी अपने सारे सामान समेट कर फरार हो गये। पुलिस के मुताबिक उसी दिन से तीनों सुरक्षाकर्मियों की तलाश की जा रही थी। उनके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लिया गया था।
जब उनके मोबाइल में नये सिम डालकर सक्रिय किया गया तो उनकी लोकेशन बीकेटी मिली। पुलिस को तो एक बार लगा कि अब इस हत्याकांड की कड़ियां खुल जाएंगी। जल्द ही हत्या का राजफाश हो जाएगा। लेकिन कुछ ही घंटों में पुलिस को बड़ा झटका लगा। सुरक्षाकर्मियों ने अपना मोबाइल बीकेटी के एक गांव में फेंक दिया था। जिसे गांव के ही एक नाबालिग व दो युवकों ने बाग में पेड़ के नीचे से उठाया। उसमें दूसरा सिम लगाकर प्रयोग शुरू कर दिया। तीनों बच्चों ने बताया कि मोबाइल रविवार की सुबह पेड़ के नीचे मिले थे। पुलिस को आशंका है कि तीनों सुरक्षाकर्मी बीकेटी की तरफ से ही निकले हैं।
दो महीने पहले ही होनी थी हत्या
पुलिस के मुताबिक अब तक के पड़ताल में सामने आया कि रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर की हत्या की साजिश कई महीने पहले रची गई थी। दो महीने ही हत्या होनी थी। लेकिन उस समय दो शूटर बिहार से आने थे। वह पहुंच नहीं सके। जबकि दो ने पहले से ही डेरा जमा लिया था। इस लिए वारदात को टाल दिया गया था। बिहार में गोरख ठाकुर के दुश्मनों की लम्बी फेहरिस्त है। इनमें से नौ लोगों से बिहार गई पुलिस ने पूछताछ की तो ऐसे ही कई तथ्य सामने आये। वहीं पुलिस ने उस होटल के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जहां दो शूटरों के कुछ घंटे रुकने का दावा किया जा रहा है।
बिहार पुलिस भी नहीं कर सकी थी एनकाउंटर
पुलिस के मुताबिक, 2019 के जानलेवा हमले में दिव्यांग होने के कुछ महीने बाद गोरख बेतिया गया था। यहां नगर परिषद के उप-सभापति कयूम अंसारी के यहां शादी समारोह में शामिल हुआ। गोरख के आने की भनक लगते ही बेतिया पुलिस ने उसके एनकाउंटर की योजना बना डाली। कयूम के घर के चारों तरफ सादे कपड़ों में पुलिस खड़ी रही, लेकिन गाड़ी से उतरकर व्हीलचेयर पर बैठे गोरख को वहां मौजूद कुछ लोगों पर संदेह हुआ। कुछ पुलिसकर्मियों को उसने पहचान लिया। धीरे से वह कहां गायब हो गया। पुलिस भी तलाश नहीं पाई।
मुठभेड़ में मारने की कोशिश करने में असफल बिहार पुलिस ने लखनऊ तक वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर का पीछा किया। लेकिन यहां भी कई दिनों तक डेरा डालने केबाद असफलता ही हाथ लगी। सूत्रों के मुताबिक गोरख उर्फ वीरेंद्र यूपी की राजनैतिक गलियारे में भी अपनी पकड़ बना ली थी। वह लखनऊ से पश्चिम चंपारण के अपराध जगत में अपने गिरोह को संचालित करने लगा। हत्या में शामिल बिहार पुलिस की वर्दी पहने शूटर यूपी पुलिस के लिए अनसुलझे सवाल की तरह खड़े हो गये हैं। यहां तक कि पुलिस को अभी तक कार की भी डिटेल नहीं मिल सकी है।
बिहार में भटक रही उत्तर प्रदेश पुलिस को सिर्फ आरोपियों की फोटो ही मिल सकी है। रेलवे ठेकेदार की हत्या में सिर्फ बिहार पुलिस की वर्दी में शूटर ही नहीं थे। बल्कि कोई पुलिसकर्मी भी था। जिसे कैमरे में देखने केबाद वीरेंद्र ठाकुर ने दरवाजा खोलने के लिए कहा। उसकी मदद से कैंट इलाके में होटल में ठहरने का इंतजाम भी किया गया था। प्रभारी निरीक्षक कैंट शिवचरण लाल के मुताबिक कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। शूटरों का रूट मैप हाथ लग गया है। जल्द ही वारदात का खुलासा कर दिया जाएगा।