यूपी: पॉलीटेक्निक के छात्रावास में खिड़कियों के कांच गायब, टूटकर गिरता प्लॉस्टर; छात्रों को बीमार कर रही गंदगी
लखनऊ के जीबी पंत पॉलीटेक्निक छात्रावास में बदहाल सुविधाओं से छात्र परेशान हैं। खिड़कियों के कांच और जालियां गायब हैं, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना है। गंदगी और मच्छरों से छात्र बीमार पड़ रहे हैं। टूटता प्लास्टर, जर्जर शौचालय और अपर्याप्त पेयजल व्यवस्था भी गंभीर समस्या बनी हुई है।
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समाज कल्याण विभाग से संचालित मोहान रोड की राजकीय गोविंद बल्लभ पंत पॉलीटेक्निक के छात्रावासों केे ज्यादातर कमरों की खिड़कियों के ऊपर का कांच गायब और जाली तक नहीं लगी है। परिसर में झाड़-झंकाड़ उगी है। जहरीले जीव-जंतुओं के घुसने का डर, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप छात्रों को बीमार कर रहा है।
जीबी पंत पॉलीटेक्निक में सिर्फ छात्रों के लिए ही छात्रावास की व्यवस्था है। परिसर में सिद्धार्थ और डॉ. आंबेडकर दो छात्रावास हैं। इनमें 150 के करीब छात्रों के रहने की व्यवस्था है। दो मंजिला भवन में बने कमरों में रहने वाले छात्रों को बेड तो मिल गया लेकिन खिड़कियों के ऊपर कांच या जाली तक नहीं लगवाई गई।
इससे कोई भी जीव-जंतु अंदर आ सकता है। गंदगी की वजह से मच्छरों का प्रकोप इस कदर है कि हॉस्टल में रहने वाले छात्र आए दिन बुखार की चपेट में आ जाते हैं। सुशील, राहुल व अन्य छात्रों ने बताया कि इस संबंध में भी कई प्रार्थना पत्र दिए गए लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ।
शिकायतें कई, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
सिद्धार्थ छात्रावास में रहने वाले मंगला प्रसाद और अन्य छात्रों ने बताया कि पेयजल के नाम पर अभी कुछ दिन पहले ही दूसरे तल पर वाटर फ्रीजर लगाया गया है। इसमें टंकी काफी कम क्षमता की रखी गई। अक्सर पानी खत्म हो जाता है। कभी-कभार रात के समय कॉलेज गेट के समीप लगे फ्रीजर से पानी लाना पड़ता है।
टूटकर गिरता है प्लास्टर, शौचालय के पल्ले गायब
सिद्धार्थ हॉस्टल के पहले तल के स्नानघर-शौचालय में छत का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। छत की सरिया नजर आने लगी है। छत से पानी भी टपकता है। कुछ दिन पहले एक छात्र चोटिल होने से भी बचा। कई शौचालयों में दरवाजा तो लगा लेकिन पल्ला गायब है।
दोबारा आगणन कराने को कहा
जीबी पंत पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य अंजू सिंह ने बताया कि बारिश थमने पर साफ-सफाई कराई जाएगी। कुछ जगहों पर खिड़कियों में जाली लगवा दी गई है। वाटर फ्रीजर भी लगवाया गया है। टंकी की क्षमता कम होने की बात सामने आई है। हॉस्टल की मरम्मत के संबंध में बीते वर्ष स्टीमेट भेजा गया था। दोबारा आगणन कराने को कहा गया है।