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मोबाइल व इंटरनेट आपके बच्चों को कर रहा बीमार, 4 अप्रैल से केजीएमयू में होगा इलाज
Thu, 28 Mar 2019 12:08 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 28 Mar 2019 12:08 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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लखनऊ निवासी सत्यम (14) कक्षा छह और सात में अपने स्कूल का टॉपर था, लेकिन आठवीं में उसके परीक्षा परिणाम में 20 फीसदी की गिरावट आई। वह जिद्दी हो गया। लगातार सिर दर्द और बेचैनी रहने लगी। परिवारीजनों ने केजीएमयू दिखाया तो पता चला कि वह लगातार मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग करने की वजह से बीमार हो गया।
सत्यम की तरह से केजीएमयू में 10 से 22 साल की उम्र वाले मरीजों में करीब 25 फीसदी तकनीक के लती होने की वजह से बीमार हैं। अब इन बच्चों व किशोरों के इलाज के लिए केजीएमयू में चार अप्रैल से ‘क्लीनिक फॉर प्रॉब्लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी’ खोली जा रही है। ओपीडी हर बृहस्पतिवार को चलेगी।
क्लीनिक में आने वाले किशोरों व बच्चों की व उनके घरवालों की काउंसलिंग की जाएगी। केजीएमयू के मनोचिकित्सा रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से संबंधित व्यवहार संबंधी विकारों के प्रबंधन के लिए के लिए यह क्लीनिक शुरू की जा रही है।
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क्लीनिक में काउंसलिंग और साइकोथेरैपी के माध्यम से इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की लत छुड़ाने और इसके प्रबंधन की तरकीब बताई जाएगी। बच्चों एवं किशोरों को टेक्नोलॉजी के स्वस्थ उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। क्लीनिक का उद्देश्य टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की लत के बारे में जागरूकता बढ़ाना होगा।
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सत्यम की तरह से केजीएमयू में 10 से 22 साल की उम्र वाले मरीजों में करीब 25 फीसदी तकनीक के लती होने की वजह से बीमार हैं। अब इन बच्चों व किशोरों के इलाज के लिए केजीएमयू में चार अप्रैल से ‘क्लीनिक फॉर प्रॉब्लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी’ खोली जा रही है। ओपीडी हर बृहस्पतिवार को चलेगी।
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क्लीनिक में आने वाले किशोरों व बच्चों की व उनके घरवालों की काउंसलिंग की जाएगी। केजीएमयू के मनोचिकित्सा रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से संबंधित व्यवहार संबंधी विकारों के प्रबंधन के लिए के लिए यह क्लीनिक शुरू की जा रही है।
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क्लीनिक में काउंसलिंग और साइकोथेरैपी के माध्यम से इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की लत छुड़ाने और इसके प्रबंधन की तरकीब बताई जाएगी। बच्चों एवं किशोरों को टेक्नोलॉजी के स्वस्थ उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। क्लीनिक का उद्देश्य टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की लत के बारे में जागरूकता बढ़ाना होगा।
मानसिक विकार है ऑनलाइन गेम
डेमो
- फोटो : डेमो
बंगलूरू व दिल्ली में है ऐसी क्लीनिक
यह क्लीनिक उत्तर प्रदेश में अभी तक किसी भी चिकित्सा संस्थान ने नहीं खोली है। दिल्ली और बंगलूरू के चिकित्सा संस्थानों में इस तरह सेवाएं दी जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जून 2018 में ऑनलाइन गेमिंग को एक मानसिक विकार के रूप में मान्यता दी है। सोशल मीडिया के उपयोग को नशे की लत के रूप में मान्यता दी जा रही है, क्योंकि लोग लगातार खबरों के लिए अपने स्मार्टफोन की जांच करते रहते हैं।
ज्यादा निगेटिव हो रहे लोग
टेक्नोलॉजी या इंटरनेट के अत्यधिक और अनियंत्रित प्रयोग से लोगों का कार्य एवं व्यवहार नकारात्मक होता जा रहा है। नेट की लत की वजह से सामाजिक दायरे के घटने लगे हैं। देश में 493 मिलियन इंटरनेट या ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं।
भारत में लगभग 28 फीसदी शहरी और 26 फीसदी ग्रामीण जनसंख्या है। नौ फीसदी उपयोगकर्ताओं के प्रति वर्ष बढ़ रहे हैं। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 12 फीसदी लोग इंटरनेट की लत की समस्या से पीड़ित हैं।
यह क्लीनिक उत्तर प्रदेश में अभी तक किसी भी चिकित्सा संस्थान ने नहीं खोली है। दिल्ली और बंगलूरू के चिकित्सा संस्थानों में इस तरह सेवाएं दी जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जून 2018 में ऑनलाइन गेमिंग को एक मानसिक विकार के रूप में मान्यता दी है। सोशल मीडिया के उपयोग को नशे की लत के रूप में मान्यता दी जा रही है, क्योंकि लोग लगातार खबरों के लिए अपने स्मार्टफोन की जांच करते रहते हैं।
ज्यादा निगेटिव हो रहे लोग
टेक्नोलॉजी या इंटरनेट के अत्यधिक और अनियंत्रित प्रयोग से लोगों का कार्य एवं व्यवहार नकारात्मक होता जा रहा है। नेट की लत की वजह से सामाजिक दायरे के घटने लगे हैं। देश में 493 मिलियन इंटरनेट या ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं।
भारत में लगभग 28 फीसदी शहरी और 26 फीसदी ग्रामीण जनसंख्या है। नौ फीसदी उपयोगकर्ताओं के प्रति वर्ष बढ़ रहे हैं। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 12 फीसदी लोग इंटरनेट की लत की समस्या से पीड़ित हैं।
जानें क्या करें अभिभावक
डेमो
ये लक्षण दिखें तो सावधान हो जाइए
- बच्चा लगातार इंटरनेट का प्रयोग करता रहे।
- चिड़चिड़ा हो जाए। रात में कम सोए
- कंधे और गले के पास दर्द होने लगे।
- मोबाइल छुपाकर रखे या रिचार्ज के लिए चोरी करने लगे।
- घर के अंदर से रुपये या अन्य कोई सामान अचानक गायब हो जाए।
- पढाई - लिखाई में मन न लगे।
- आंसू ज्यादा निकले। भावुकता बढ़ने लगे।
- अवसादग्रस्त दिखने लगे।
क्या करें अभिभावक
बच्चों को डांटने के बजाय प्यार से समझाएं
इलेक्ट्रॅानिक गजट निर्धारित समय केलिए दें।
बच्चा कौन सी वेबसाइट देख रहा, इस पर नजर रखें।
उसे कुछ देर आउटडोर गेम के लिए प्रेरित करें।
- बच्चा लगातार इंटरनेट का प्रयोग करता रहे।
- चिड़चिड़ा हो जाए। रात में कम सोए
- कंधे और गले के पास दर्द होने लगे।
- मोबाइल छुपाकर रखे या रिचार्ज के लिए चोरी करने लगे।
- घर के अंदर से रुपये या अन्य कोई सामान अचानक गायब हो जाए।
- पढाई - लिखाई में मन न लगे।
- आंसू ज्यादा निकले। भावुकता बढ़ने लगे।
- अवसादग्रस्त दिखने लगे।
क्या करें अभिभावक
बच्चों को डांटने के बजाय प्यार से समझाएं
इलेक्ट्रॅानिक गजट निर्धारित समय केलिए दें।
बच्चा कौन सी वेबसाइट देख रहा, इस पर नजर रखें।
उसे कुछ देर आउटडोर गेम के लिए प्रेरित करें।