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UP Chunav 2022: सपा में शामिल होने वाले विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने 18 दिन बाद भाजपा में की घर वापसी
Mon, 31 Jan 2022 02:23 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 31 Jan 2022 02:23 PM IST
सार
सपा में शामिल होने वाले भाजपा विधायक सोमवार को एक बार फिर भाजपा में शामिल हो गए।
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विधायक बाला प्रसाद अवस्थी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
धौरहरा से भाजपा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने महज 18 दिन साइकिल की सवारी करने के बाद सोमवार को लखनऊ में प्रायश्चित करते हुए भाजपा में घर वापसी कर ली। लखनऊ में भाजपा मुख्यालय में डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उनकी भाजपा में वापसी करवाई। दूसरी बार भाजपा में घर वापसी के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह कुछ करीबियों के षडयंत्र का शिकार हो गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे राजीव अवस्थी को राजनीतिक उत्तराधिकारी बताते हुए कहा कि राजीव उनकी विरासत संभालेंगे और भाजपा को जिताने में मदद करेंगे।
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जनवरी में जिले की सियासत का पारा कदर गरम था। नेताओं की दल बदलने की खबरें सुर्खियों में रहीं। इस बात को उस वक्त बल मिला जब 13 जनवरी को लखनऊ में धौरहरा से भाजपा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर सपा का दामन थाम लिया था। भाजपा के अन्य विधायकों के दल बदलने की खबरें हवा में तैरती रहीं। मजबूरन गोला से भाजपा विधायक अरविंद गिरि और पलिया से भाजपा विधायक रोमी साहनी को बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दल बदलने की अटकलों को खारिज करना पड़ा।
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वहीं, जब भाजपा ने 21 जनवरी को धौरहरा को छोड़कर जिले की सभी आठ विधान सभा सीटों पर प्रत्याशियों को दोहराने का एलान किया तो बाला प्रसाद अवस्थी को तगड़ा झटका लगा। उन्हें एक और झटका तब लगा जब 27 जनवरी दिन बृहस्पतिवार को उनके बेटे राजीव अवस्थी की जगह समाजवादी पार्टी ने अपने भरोसेमंद रहे पूर्व मंत्री और मरहूम यशपाल चौधरी के बेटे वरुण चौधरी नीलू को टिकट दे दिया। बेटे को टिकट न मिलने से नाराज विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने सपा के टिकट के एलान के चार दिन बाद सोमवार को भाजपा में घर वापसी कर ली।
1991- धौरहरा- भाजपा
2007- धौरहरा- बसपा
2012- मोहम्मदी- बसपा
2017- धौरहरा- भाजपा
बाला प्रसाद अवस्थी अपने बेटे राजीव के लिये टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन, सपा हमेशा जिताऊ उम्मीदवार लड़ाती है। वरुण चौधरी हमारे पूर्व मंत्री यशपाल चौधरी के बेटे हैं, जिन्होंने दशकों से पार्टी का डंडा और झंडा उठाया है। ऐसे में उन्हें टिकट न देना नाइंसाफी होती। बाला प्रसाद अवस्थी अगर जिताऊ होते तो भाजपा को क्यों छोड़ते। उनके जाने से सपा को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रामपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा
षड्यंत्र का शिकार हो गया था - बाला प्रसाद
बाला प्रसाद अवस्थी ने अपनी सफाई में कहा कि कुछ विशिष्ट लोगों के षडयंत्र के कारण उन्होंने सपा जॉइन की थी। जब उन्हें महसूस हुआ कि मिशन 2022 को देखते हुए राष्ट्रहित में अपने परिवार के साथ जाना चाहिए तो उन्होंने तत्काल घर वापसी कर ली। उन्होंने कहा कि भाग्य और समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता। लेकिन उनकी वजह से कहीं जिले की कोई भाजपा की सीट 100-50 वोट से हार जाए तो इसका अफसोस उन्हें पूरे जीवन में रहेगा। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे राजीव अवस्थी को यहां फिर आगे करते हुए राजनीतिक और पारिवारिक उत्तराधिकारी बताया और भाजपा को पूरे ईमानदारी और निष्ठा से बतौर कार्यकर्ता पूरा करेंगे।दूसरी बार भाजपा में घर वापसी
विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने लखनऊ में भाजपा में एक बार फिर घर वापसी कर ली। इससे पहले वह 2007 में भाजपा छोड़ बसपा में चले गए थे और दो बार बसपा से विधायक रहने के बाद 2017 में फिर भाजपा में शामिल हो गए। जबकि 2021 में सपा में गए और 18 दिन बाद फिर भाजपा में दूसरी बार घर वापसी कर ली।बाला प्रसाद का सियासी सफर
वर्ष - विधान सभा- पार्टी1991- धौरहरा- भाजपा
2007- धौरहरा- बसपा
2012- मोहम्मदी- बसपा
2017- धौरहरा- भाजपा
बाला प्रसाद अवस्थी अपने बेटे राजीव के लिये टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन, सपा हमेशा जिताऊ उम्मीदवार लड़ाती है। वरुण चौधरी हमारे पूर्व मंत्री यशपाल चौधरी के बेटे हैं, जिन्होंने दशकों से पार्टी का डंडा और झंडा उठाया है। ऐसे में उन्हें टिकट न देना नाइंसाफी होती। बाला प्रसाद अवस्थी अगर जिताऊ होते तो भाजपा को क्यों छोड़ते। उनके जाने से सपा को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
रामपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा