MRI रूम में जबरदस्ती घुसा मंत्री का गनर, मशीन में जा फंसी पिस्टल
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लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल इंस्टीट्यूट में खादी ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी के शैडो मुकेश शर्मा की पिस्टल एमआरआई मशीन में फंस गई। मशीन के आसपास का एरिया चुंबकीय क्षेत्र होता है, यहां लोहा समेत किसी भी तरह की धातु का सामान ले जाना मना होता है। बता दें कि मशीन ठीक होने में अब करीब 15 दिन लगेंगे और 50 लाख रुपए का खर्चा आएगा।
बार-बार रोके जाने के बावजूद मुकेश नहीं माना और पिस्टल लेकर कंसोल रूम में घुस गया। अंदर जाते ही उसकी कमर में लगी पिस्टल खिंचकर एमआरआई में जा घुसी। इसी के साथ मशीन बंद हो गई और वहां हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में मंत्री को एमआरआई रूम से बाहर निकाला गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कंपनी के इंजीनियर के आने के बाद पिस्टल मशीन से बाहर निकाली जा सकेगी। इसमें लगभग एक सप्ताह से अधिक का समय लगेगा।
खादी ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी को चक्कर आने की शिकायत है। शुक्रवार को वह लगभग एक बजे वह अपने लाव-लश्कर के साथ लोहिया इंस्टीट्यूट पहुंचे थे। इमरजेंसी में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और एमआरआई कराने भेजा।
रोकने पर भी नहीं माना था गार्ड
इसी दौरान मंत्री का शैडो मुकेश शर्मा जबरदस्ती मशीन रूम में घुसने की कोशिश करने लगा। वहां तैनात कर्मचारियों व अन्य लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन शैडो ने किसी की नहीं सुनी और उन्हें धक्का देते हुए मुख्य कमरे में पहुंच गया।
उसने अपनी पिस्टल भी कमर में लगा रखी थी। जैसे ही वह एमआरआई रूम में पहुंचा कमर से पिस्टल खिंचकर मशीन के चुबंकीय हिस्से में जा घुसी। इससे तेज आवाज के साथ मशीन बंद हो गई और कमरे में हड़कंप मच गया। मंत्री सत्यदेव पचौरी भी स्ट्रेचर से उठकर भागे। इसके बाद सभी को कमरे से बाहर निकाला गया। हालांकि किसी को भी इस हादसे में चोट नहीं आई है।
मशीन में पिस्टल फंस जाने से लोहिया संस्थान में एमआरआई ठप हो गया। कंपनी का इंजीनियर आने के बाद ही मशीन से पिस्टल को निकाला जा सका। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मशीन को बंद करके उसका चुंबकीय क्षेत्र खत्म नहीं किया जाएगा, पिस्टल को निकाला नहीं जा सकता।
ये काम कंपनी के इंजीनियर के आने के बाद ही होगा। इसमें एक सप्ताह या उससे अधिक समय भी लग सकता है। बताया जा रहा है कि पांच करोड़ से भी अधिक लागत की एमआरआई मशीन तीन टेसला पावर की है। जो काफी शक्तिशाली चुंबकीय शक्ति वाली है। इसमें लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
मंत्री सत्यदेव पचौरी के शैडो की गलती होने केकारण लोहिया इंस्टीट्यूट प्रशासन इस मामले में कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। निदेशक प्रो.दीपक मालवीय, रेडियोडायग्नोसिस विभाग की हेड प्रो. रागिनी सिंह ने इस विषय में कुछ बोलने से ही मनाकर दिया। सिर्फ कंपनी के इंजीनियर के आने के बाद ही मशीन शुरू होने की बात कही। वहीं शनिवार को मिली सूचना के मुताबिक मशीन ठीक होने में कम से कम 15 दिन लगेंगे और 50 लाख रुपए का खर्चा आएगा।