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32 पुराने मामले में मंत्री मोहसिन रजा का बयान दर्ज
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लखनऊ। ट्रक ड्राइवर के साथ मारपीट करने के 32 साल पुराने मामले में आरोपी और इस समय प्रदेश सरकार में मंत्री मोहसिन रजा और एक अन्य अकबर हुसैन के बयान दर्ज किए गए। एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के लिए आठ नवम्बर की तारीख तय की है। गत 29 अक्तूबर को कोर्ट ने गवाहों की गैरहाजिरी के चलते साक्ष्य का अवसर समाप्त करते हुए मामले की कार्रवाई को आगे बढ़ाया था।
पत्रावली के अनुसार, मारपीट के इस मामले की वादी लल्लन ने 19 मई 1989 को आरोपी अरशद उर्फ मोहसिन रजा तथा अकबर हुसैन के विरुद्ध थाना वजीरगंज में रिपोर्ट लिखाई थी जिसमें कहा गया था कि वादी घटना के दिन ट्रक संख्या यूटीसी .9810 को लेकर नबीउल्लाह रोड से बड़े छत्ते पुल की तरफ जा रहा था तभी दोनों आरोपियों ने उसे ट्रक से खींचकर पीटा जिससे उसे काफी चोटें आई थीं।
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6.50 करोड़ हड़पने में जमानत अर्जी खारिज
लखनऊ। धोखाधड़ी, कूटरचना करके 120 करोड़ की नमक सप्लाई दिलाने कर नाम पर 6 करोड़ 50 लाख रुपये हड़पने के आरोपी उमेश कुमार मिश्र की जमानत अर्जी को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश रमाकांत प्रसाद ने खारिज कर दिया है।
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सरकारी वकील प्रभा वैश्य और अभितेश मिश्र ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए बताया कि गुजरात के व्यापारी नीलम नरेंद्र भाई पटेल ने हजरतगंज में 11 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके परिचित कलीम अहमद ने राजस्थान के कथित विधायक सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर से मुलाकात कराई थी जिसने लखनऊ में 120 करोड़ का टेंडर दिलवाने का आश्वासन देकर 6 करोड़ 50 लाख रुपये हड़प लिए। (संवाद)
58 करोड़ के गबन में बर्खास्त महाप्रबंधक को जमानत नहीं
लखनऊ। उप्र अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम में आए धन को अल्पसंख्यकों के विकास की जगह खुद के प्रयोग में लेकर निगम को 58 करोड़ 73 लाख 44 हजार रुपये का गबन करने के आरोपी निगम के बर्खास्त महाप्रबंधक वित्त एवं लेखा मसूद अख्तर की जमानत अर्जी को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश रमाकांत प्रसाद ने खारिज कर दिया। कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक अभितेश मिश्र ने बताया कि उप्र. अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के निदेशक अब्दुल वाहिद ने हजरतगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। (संवाद)
दर्ज रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्त एवं लेखा के लेखाधिकारी और नामित महाप्रबंधक मसूद अख्तर ने निगम को राज्य सरकार से वर्ष 1986.87 से लेकर 2005.2006 के बीच मिले 7 करोड़ 52 लाख का कोई हिसाब नही दिया कि ये धन किस मद में खर्च किये गए।रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि आरोपी मसूद ने सरकारी धन के ज्यादातर हिस्से का गबन कर लिया है। कहा गया कि मामले की विवेचना के दौरान पता चला आरोपी ने 16 लाख का एफडी कराई गई लेकिन उसका कोई भी अभिलेख नहीं बनाया गया। सात करोड़ रुपये का कोई हिसाब किताब नही रखा ।कहा गया कि आरोपी ने अपनी बर्खास्तगी के वर्ष 2013-14 तक राष्ट्रीय वित्त एवं विकास निगम और उप्र सरकार से मिले कुल 72 करोड़ 4 लाख में से केवल 13 करोड़ 66 लाख 53 हजार 432 रुपये का ऋण वितरित कर उसका हिसाब दिया जबकि 58 करोड़ 73 लाख 44 हजार 560 रुपये का कोई लेखाजोखा नही दिया और उसका गबन करके सरकार को नुकसान पहुंचाया है।
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पत्रावली के अनुसार, मारपीट के इस मामले की वादी लल्लन ने 19 मई 1989 को आरोपी अरशद उर्फ मोहसिन रजा तथा अकबर हुसैन के विरुद्ध थाना वजीरगंज में रिपोर्ट लिखाई थी जिसमें कहा गया था कि वादी घटना के दिन ट्रक संख्या यूटीसी .9810 को लेकर नबीउल्लाह रोड से बड़े छत्ते पुल की तरफ जा रहा था तभी दोनों आरोपियों ने उसे ट्रक से खींचकर पीटा जिससे उसे काफी चोटें आई थीं।
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6.50 करोड़ हड़पने में जमानत अर्जी खारिज
लखनऊ। धोखाधड़ी, कूटरचना करके 120 करोड़ की नमक सप्लाई दिलाने कर नाम पर 6 करोड़ 50 लाख रुपये हड़पने के आरोपी उमेश कुमार मिश्र की जमानत अर्जी को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश रमाकांत प्रसाद ने खारिज कर दिया है।
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सरकारी वकील प्रभा वैश्य और अभितेश मिश्र ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए बताया कि गुजरात के व्यापारी नीलम नरेंद्र भाई पटेल ने हजरतगंज में 11 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके परिचित कलीम अहमद ने राजस्थान के कथित विधायक सुनील उर्फ मोंटी गुर्जर से मुलाकात कराई थी जिसने लखनऊ में 120 करोड़ का टेंडर दिलवाने का आश्वासन देकर 6 करोड़ 50 लाख रुपये हड़प लिए। (संवाद)
58 करोड़ के गबन में बर्खास्त महाप्रबंधक को जमानत नहीं
लखनऊ। उप्र अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम में आए धन को अल्पसंख्यकों के विकास की जगह खुद के प्रयोग में लेकर निगम को 58 करोड़ 73 लाख 44 हजार रुपये का गबन करने के आरोपी निगम के बर्खास्त महाप्रबंधक वित्त एवं लेखा मसूद अख्तर की जमानत अर्जी को भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश रमाकांत प्रसाद ने खारिज कर दिया। कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक अभितेश मिश्र ने बताया कि उप्र. अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के निदेशक अब्दुल वाहिद ने हजरतगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। (संवाद)
दर्ज रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्त एवं लेखा के लेखाधिकारी और नामित महाप्रबंधक मसूद अख्तर ने निगम को राज्य सरकार से वर्ष 1986.87 से लेकर 2005.2006 के बीच मिले 7 करोड़ 52 लाख का कोई हिसाब नही दिया कि ये धन किस मद में खर्च किये गए।रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि आरोपी मसूद ने सरकारी धन के ज्यादातर हिस्से का गबन कर लिया है। कहा गया कि मामले की विवेचना के दौरान पता चला आरोपी ने 16 लाख का एफडी कराई गई लेकिन उसका कोई भी अभिलेख नहीं बनाया गया। सात करोड़ रुपये का कोई हिसाब किताब नही रखा ।कहा गया कि आरोपी ने अपनी बर्खास्तगी के वर्ष 2013-14 तक राष्ट्रीय वित्त एवं विकास निगम और उप्र सरकार से मिले कुल 72 करोड़ 4 लाख में से केवल 13 करोड़ 66 लाख 53 हजार 432 रुपये का ऋण वितरित कर उसका हिसाब दिया जबकि 58 करोड़ 73 लाख 44 हजार 560 रुपये का कोई लेखाजोखा नही दिया और उसका गबन करके सरकार को नुकसान पहुंचाया है।