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पशुधन फर्जीवाड़े में मंत्री जयप्रकाश निषाद ने कराया बयान दर्ज, कहा मुझे कुछ नहीं पता
Mon, 07 Sep 2020 12:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:07 AM IST
सार
- एसटीएफ की जांच के बाद हजरतगंज थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
- आधा दर्जन से अधिक हो चुके हैं गिरफ्तार, विवेचक ने जारी किया था नोटिस
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यूपी के मंत्री जयप्रकाश निषाद
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
पशुधन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगी के मामले में रविवार दोपहर को पुलिस ने राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। इस दौरान पुलिस ने उनसे कई सवाल किये लेकिन विभागीय मंत्री सिर्फ इतना ही कहते रहे कि उनको इस फर्जीवाड़े के बारे में कोई जानकारी नहीं है।राज्यमंत्री से दोपहर में करीब सवा घंटे तक उनके सरकारी आवास पर पूछताछ की गई।
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एसटीएफ ने हजरतगंज थाने में पशुधन विभाग आटा की आपूर्ति के 292 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने के नाम पर ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की जांच गोमतीनगर एसीपी श्वेता श्रीवास्तव कर रही हैं। विवेचना आगे बढ़ी तो दो डीआईजी भी इस मामले में निलंबित हुए।
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इसके बाद जांच की दायरा विभागीय मंत्री के दरवाजे तक पहुंच गया। विभागीय मंत्री को पुलिस ने बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। इसी नोटिस के बाद अपना बयान दर्ज कराने केलिए रविवार का समय दिया था।
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दोपहर को विवेचक एसीपी गोमतीनगर पुलिस टीम के साथ पशुधन राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद के सरकारी आवास गौतमपल्ली पहुंचीं। वहां पुलिस ने करीब सवा घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ में उन्होंने फर्जीवाड़े की जानकारी से इंकार किया। उन्होंने बताया कि वह एक या दो बार ही अपने निजी सचिव के कमरे में गये हैं। विवेचक केमुताबिक राज्यमंत्री से मिले जबावाें का मिलान कराया जाएगा।
यह था मामला...
पशुधन विभाग के फर्जीवाड़े में इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया से ठेका दिलाने के नाम पर नौ करोड़ 72 लाख रुपये हड़प लिये गए थे। इस मामले में मुख्यमंत्री ने एसटीएफ को जांच सौंपी थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद व्यापारी की तहरीर पर हजरतगंज में 13 जून की रात मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज देव, पत्रकार आशीष राय, अनिल राय, एके राजीव, उमाशंकर और रूपक को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बाद में इस मामले में दो और मददगार सचिन वर्मा और त्रिपुरेश पांडेय, होमगार्ड रघुबीर सिंह यादव को पकड़ा गया। इस मामले में पशुधन राज्यमंत्री से भी पूछताछ की जानी थी, लेकिन तत्कालीन विवेचक संतोष सिंह नहीं कर सकें। इस मामले में 25 अगस्त को डीआईजी अरविंद सेन और दिनेश चंद्र दुबे को निलंबित कर दिया गया। शासन का रुख देखकर विवेचना में तेजी आई। फिर पशुधन राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद को नोटिस जारी किया गया। उनसे रविवार को पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक इस मामले में अभी कई और लोगों से पूछताछ की जानी है।