गोकुल एवं नंदबाबा पुरस्कार: 107 लोग पुरस्कृत, पशुधन मंत्री बोले-सीएम ने इतना बजट दिया...कि खर्च नहीं कर पा रहे
गोकुल एवं नंदबाबा पुरस्कार से 107 लोगों को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पशु सुधार के लिए हमें चिंता करनी चाहिए। सीएम योगी भी विभाग को लेकर काफी संजीदा हैं। इतना बजट दिया कि खर्च नहीं कर पा रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को उप्र प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) की ओर से वर्ष 2023-24 के गोकुल व नंदबाबा पुरस्कारों का वितरण किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12.30 बजे से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुरू हुआ। इसमें पशुधन व दुग्ध विकास विभाग मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोकुल पुरस्कार से 63 और नंदबाबा पुरस्कार से 44 लाभार्थियों को पुरस्कृत किया।
पीसीडीएफ के डॉ. मनोज तिवारी ने बताया कि गोकुल पुरस्कार में पहला पुरस्कार दो लाख, दूसरे को 1.50 लाख व अन्य 61 को 51-51 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न दिया गया। नंदबाबा में पहला पुरस्कार 51 हजार और अन्य 43 लाभार्थियों को 21-21 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र व प्रतीक चिह्न दिए गए।
इस मौके पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि आवारा घूम रहे पशु छुट्टा नहीं लोगों द्वारा छोड़े हुए हैं। 15 मार्च से निराश्रित गोवंश के गले में रेडियम बेल्ट सड़क किनारे बसे गांव में लगाएंगे। इससे सड़क हादसे कम होंगे, गोवंश संरक्षण होगा। इस बार सीएम ने गोवंश संरक्षण के लिए 2000 करोड़ का बजट दिया है।
ट्रेनिंग के लिए भी बजट में पैसा दिया गया
मंत्री ने कहा कि 7713 गोआश्रय स्थलों में गायों का संरक्षण होगा। अब जो नए गोआश्रय स्थल बनेंगे, वह बाउंड्रीवाल के साथ बनाए जाएंगे। इसके लिए बजट प्रावधान किया गया है। गाय दूध कम देने के बाद छूटे नहीं। देशी गाय में नस्ल सुधार कर रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान कराए। साहीवाल गाय पालें। इसका दूध बेहतर है। ट्रेनिंग के लिए भी बजट में पैसा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों, किसानों को पालन, संरक्षण, कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रशिक्षित करेंगे। दुग्ध संघों का सुदृढ़ीकरण कर रहे हैं। दुग्ध समितियों का गठन कर रहे हैं। छोटे किसान का इसको लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर सरकार काम कर रहे हैं। अब यह विभाग बड़ा विभाग हो गया है।
देशी गाय पालने, दूध पर ध्यान देंगे तो बेहतर होगा
कहा कि देशी गाय के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है। देशी गाय का दूध अमृत है। इसलिए, देशी नस्ल की गया को संरक्षित और सुरक्षित रखें। उसके दूध में पूरा आहार, पौष्टिकता है। कई संत सिर्फ गाय का दूध पीकर ही रहते हैं। देशी गाय पालने, उसके दूध पर ध्यान देंगे तो बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि खेती और पशु एक दूसरे के पूरक हैं। चारे का रकबा बहुत कम, अन्य प्रदेश की अपेक्षा। हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड में ज्यादा है। अपने लिए अन्य के साथ पशु चारे का भी प्रबंध करें। गाय पर आधारित खेती करें। कीटनाशक का कम प्रयोग करें। यूपी में ज्यादा केमिकल युक्त दूध बिक रहा है। दूध के लिए पशु पालन जरूरी है।