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बिजली बिल का न्यूनतम चार्ज हो माफ, ईएसआईसी फंड से मजदूरों को दिया जाए वेतन
Sat, 28 Mar 2020 03:51 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 28 Mar 2020 03:51 PM IST
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electricity meter
- फोटो : अमर उजाला
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने लॉकडाउन से प्रभावित एमएसएमई उद्योगों को राहत पैकेज देने की गुहार लगाई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज कुमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को यदि राहत नहीं दी गई, तो ये तबाह हो जाएंगे। उन्होंने पत्र में कहा है कि विद्युत वितरण कंपनियां एमएसएमई उद्योगों से लॉकडाउन की अवधि का न्यूनतम चार्ज न लें। फिक्स चार्ज भी मासिक औसत के आधार पर लिया जाए।
पंकज ने कहा कि एमएसएमई उद्यमियों को बिना काम वेतन देने के लिए बाध्य न किया जाए। जो मजदूर या कर्मचारी ईएसआईसी में पंजीकृत हैं, उन्हें ईएसआईसी के रिजर्व फंड से वेतन दिया जाए। जो पंजीकृत नहीं हैं, उनके लिए सरकार मुफ्त राशन की व्यवस्था करे। उद्यमियों को एक साल तक पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी की राशि भुगतान से छूट दी जाए।
सरकारी विभागों से आपूर्ति के जो ऑर्डर मिले हैं, उनकी अंतिम तिथि 31 मार्च के बजाय 30 जून या लॉकडाउन की समाप्ति तक बढ़ाई जाए। ट्रेजरी से भुगतान बिल की अवधि भी 31 मार्च के बजाय 30 जून या कोरोना संकट की समाप्ति तक बढ़ाई जाए। वैट असेसमेंट भी 30 जून तक बढ़ाया जाए। प्रदेश के एमएसएमई उद्योगों के लिए अगर तत्काल राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई, तो कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला यह क्षेत्र बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा।
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पंकज ने कहा कि एमएसएमई उद्यमियों को बिना काम वेतन देने के लिए बाध्य न किया जाए। जो मजदूर या कर्मचारी ईएसआईसी में पंजीकृत हैं, उन्हें ईएसआईसी के रिजर्व फंड से वेतन दिया जाए। जो पंजीकृत नहीं हैं, उनके लिए सरकार मुफ्त राशन की व्यवस्था करे। उद्यमियों को एक साल तक पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी की राशि भुगतान से छूट दी जाए।
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सरकारी विभागों से आपूर्ति के जो ऑर्डर मिले हैं, उनकी अंतिम तिथि 31 मार्च के बजाय 30 जून या लॉकडाउन की समाप्ति तक बढ़ाई जाए। ट्रेजरी से भुगतान बिल की अवधि भी 31 मार्च के बजाय 30 जून या कोरोना संकट की समाप्ति तक बढ़ाई जाए। वैट असेसमेंट भी 30 जून तक बढ़ाया जाए। प्रदेश के एमएसएमई उद्योगों के लिए अगर तत्काल राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई, तो कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला यह क्षेत्र बंदी के कगार पर पहुंच जाएगा।
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